Bihar Eye Donation: रसियारी गांव की निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अनामिका देवी ने निधन के बाद अपने नेत्रदान से समाज सेवा का एक नया अध्याय लिखा है। बिहार के दरभंगा में शनिवार देर रात उनके निधन के उपरांत, डीएमसीएच की मेडिकल टीम ने उनके परिवार की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। यह कदम उन्होंने अपने पति प्रो0 शंभू प्रसाद मिश्रा के साथ वर्ष 2024 में लिए गए संकल्प को पूरा करते हुए उठाया।
अनामिका देवी ने जीवन भर शिक्षा और साक्षरता की अलख जगाई। उन्होंने 100 से अधिक महिलाओं को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाया। उनके इस योगदान से प्रेरणा पाकर कई महिलाएं आज भी उन्हें याद करती हैं। उनकी शिष्याएं श्यामा देवी और अनुराधा देवी ने बताया,

आज हम जो शिक्षित हैं, उसमें अनामिका देवी का बड़ा योगदान है।
आजीवन समाज सेवा का अनूठा उदाहरण
कवयित्री और हिंदी एवं मैथिली भाषा की साहित्य साधिका अनामिका देवी ने विज्ञान विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की थी। वे एक पूर्व जनप्रतिनिधि भी रहीं। उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों से कोशी, कमला, बलान, गेहुआँ और भूतही जैसी नदियों की भीषण बाढ़ से प्रतिवर्ष प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की जनता की समस्याओं को उठाया।
अनामिका देवी ने मानवीय पीड़ा को समझते हुए कई बार उच्च न्यायालय पटना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत में जनहित याचिकाएं भी दायर कीं। उनके इन प्रयासों की सरकार के विभिन्न विभागों में भी सराहना हुई, जिससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई राहें खुलीं।
परिवार भी समर्पित समाज सेवा में
अनामिका देवी का पूरा परिवार भी समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है। उनके पति प्रो शंभू प्रसाद मिश्र रामजानकी राधा कृष्ण शारदा इंटर महाविद्यालय, इंदिरा नगर, गोई मिश्र लगमा, घनश्यामपुर, दरभंगा में कार्यरत हैं।
उनके एकमात्र पुत्र डॉ पारस मणि +2 गांधी कोशी प्रावेशिका उच्च विद्यालय, रसियारी में शिक्षक हैं। उनकी पुत्रवधु श्रीमती सपना कुमारी भी अपनी सास की तरह ही एक प्रखर समाज सेविका हैं। अनामिका देवी अपने पीछे दो पुत्रियों अर्पणा कुमारी और अर्चना कुमारी, दामाद श्री वीरेंद्र झा और कई परिजनों को छोड़ गई हैं, जो सभी सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं।
ग्रामीणों ने अनामिका देवी के नेत्रदान को समाज के लिए एक प्रेरणादायी पहल बताया है। उनके इस महान कार्य से किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद है, जो उनके आजीवन सेवाभाव का सच्चा प्रतीक है।


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