Bihar Panchayat Chunav: वर्ष 2026 में होने वाले बिहार पंचायत चुनाव को लेकर राज्यभर में सरगर्मी तेज हो गई है। गांव-चौपालों पर अब एक ही चर्चा है कि आखिर चुनाव की तारीखें कब घोषित होंगी। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे अनिश्चितता का माहौल है। सबसे बड़ा पेंच परिसीमन और नए आरक्षण रोस्टर को लेकर फंसा हुआ है, यही वजह है कि चुनाव में थोड़ी देरी होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
कटिहार जिले के फलका प्रखंड में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। खेतों से लेकर चौक-चौराहों तक संभावित प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है। लेकिन, नए प्रशासनिक मानकों के तहत परिसीमन होने की सुगबुगाहट ने वर्तमान जनप्रतिनिधियों और भावी उम्मीदवारों के बीच भारी असमंजस पैदा कर दिया है।
पंचायत चुनाव 2027 तक टलने की संभावना क्यों?
विभागीय स्तर पर दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं। यदि पुराने परिसीमन पर चुनाव हुए तो 2026 में ही समय पर मतदान संपन्न हो जाएगा। वहीं, अगर परिसीमन की जटिल प्रक्रिया शुरू हुई, तो चुनाव 2027 तक खिसकने की प्रबल संभावना है। फिलहाल, वर्तमान मुखिया और पंचायत समिति सदस्य प्रखंड मुख्यालय का लगातार चक्कर लगा रहे हैं। वे विकास शाखा और पंचायती राज कार्यालय में यह टटोलने की कोशिश कर रहे हैं कि नए परिसीमन में कौन सा गांव किस पंचायत से कटेगा और किसमें जुड़ेगा।
आरक्षण का चक्र बदलने से कौन सी सीट किस वर्ग (सामान्य, पिछड़ा, अति पिछड़ा या अनुसूचित जाति) के खाते में जाएगी, इसे लेकर भी खासी बेचैनी है। हालांकि, आधिकारिक अधिसूचना के अभाव में कर्मियों से सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है।
सियासी जमीन खिसकने का डर, नए समीकरण
वर्तमान जनप्रतिनिधियों को सबसे ज्यादा डर अपने पुराने वोट बैंक के खिसकने का सता रहा है। यदि उनकी पंचायत का स्वरूप बदला, तो उनकी सियासी जमीन भी खिसक सकती है। वहीं, कई नए दावेदार आरक्षण के हिसाब से दूसरे पदों पर अपनी किस्मत आजमाने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। अंदरखाने से खबर है कि परिसीमन का काम लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में यह उम्मीद जताई जा रही है कि चुनाव तय समय पर, यानी इसी साल कराए जा सकते हैं।
7500 की आबादी पर नई पंचायतों का फार्मूला
विभागीय सूत्रों के अनुसार, 7500 की आबादी पर नई पंचायतों और वार्डों के गठन का फार्मूला लागू होने की चर्चा जोरों पर है। ऐसा हुआ तो राज्य के कई प्रखंडों सहित कटिहार के फलका की पंचायतों का भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा। अंतिम फैसला सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर ही निर्भर करेगा। इस बदलाव का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा।







