Bihar Education News: बिहार के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक सुधार के दावों के बीच, सुपौल से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिलाधिकारी सावन कुमार के औचक निरीक्षण ने त्रिवेणीगंज बाजार स्थित सरस्वती विद्या निकेतन की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का पर्दाफाश कर दिया। स्कूल में कुल 541 विद्यार्थियों का नामांकन था, लेकिन कक्षाओं में छात्रों का सन्नाटा देखकर डीएम दंग रह गए। इस स्थिति पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
निरीक्षण के दौरान उपस्थिति पंजिका की जांच में हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए। नौवीं कक्षा में 115 नामांकित बच्चों में से केवल 9 छात्र मौजूद मिले। वहीं, दसवीं कक्षा में 272 विद्यार्थियों में से महज 6 बच्चे ही उपस्थित थे। सबसे चिंताजनक स्थिति 11वीं और 12वीं की रही, जहां क्रमशः 78 और 76 नामांकित छात्रों में से एक भी विद्यार्थी कक्षा में मौजूद नहीं था।
स्कूल में छात्रों का सन्नाटा, शिक्षकों की भी लापरवाही
जिलाधिकारी ने सिर्फ उपस्थिति ही नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता की भी पड़ताल की। गणित की कक्षा में पहुंचकर जब उन्होंने बच्चों से विषय से जुड़े सवाल पूछे, तो छात्र सही जवाब देने में असफल रहे। विद्यालय में कुल 26 शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनमें से 20 उपस्थित पाए गए, जबकि 2 शिक्षक प्रशिक्षण पर और 4 अवकाश पर थे। स्कूल की पुस्तकालय की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। डीएम ने बीडीओ को लाइब्रेरियन की शैक्षणिक योग्यता की जांच करने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि ‘विद्यालय में पठन-पाठन का माहौल निराशाजनक है और जिला शिक्षा पदाधिकारी को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।’
डीएम ने बीडीओ को दिए जांच के निर्देश, विकास कार्यों की भी समीक्षा
विद्यालय के निरीक्षण के बाद, डीएम सावन कुमार ने प्रखंड कार्यालय में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। कायाकल्प योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, आईसीडीएस और पंचायती राज विभाग से संबंधित कुल 230 योजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। इनमें से 56 योजनाओं पर काम अभी जारी है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सभी विकास कार्य 5 नवंबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। इस घटना ने बिहार एजुकेशन न्यूज़ में सरकारी स्कूलों की निगरानी और जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।








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