Bapu Tower Fellowship: पटना स्थित बापू टावर फेलोशिप के लिए आवेदन करने वाले शोधार्थियों को बड़ी राहत मिली है। इस प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को अब 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है। पहले यह समय सीमा 15 अक्टूबर निर्धारित की गई थी, जिससे इच्छुक अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी पूरी करने के लिए और अधिक समय मिल गया है। यह फेलोशिप महात्मा गांधी और बिहार से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर गहन शोध के लिए प्रदान की जाती है।
इस योजना के तहत कुल पांच योग्य शोधार्थियों का चयन किया जाएगा। प्रत्येक चयनित शोधार्थी को एक वर्ष के कार्यकाल के लिए पांच-पांच लाख रुपये की एकमुश्त फेलोशिप राशि मिलेगी। यह फेलोशिप गांधीवादी विचारों और बिहार के संदर्भ में उनके प्रभाव पर शोध करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
कौन कर सकता है बापू टावर फेलोशिप के लिए आवेदन?
बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने पात्रता मानदंडों के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि आवेदक के पास गांधीवादी विचारधारा या संबंधित विषयों में स्नातक अथवा उससे उच्चतर शैक्षणिक डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, वे अभ्यर्थी भी आवेदन के पात्र होंगे जिन्होंने महात्मा गांधी और उनके जीवन दर्शन से जुड़े क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष से अधिक समय तक व्यावहारिक कार्य किया हो।
निदेशक विनय कुमार ने स्पष्ट किया, “उच्चतर शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों और गांधी दर्शन के क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक कार्यानुभव वाले अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदक की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित की गई है।”
शोध प्रस्ताव और आवेदन प्रक्रिया
फेलोशिप के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों को अपना विस्तृत बायोडाटा (रिज्यूमे), नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो के साथ एक शोध प्रस्ताव जमा करना होगा। यह शोध प्रस्ताव प्रस्तावित विषय पर 4000 से 5000 शब्दों के बीच होना चाहिए, जिसमें शोध की रूपरेखा और उद्देश्य स्पष्ट रूप से वर्णित हों।
आवेदन जमा करने के लिए अभ्यर्थियों के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं। वे अपने आवेदन पत्र और संबंधित दस्तावेज ‘बापू टावर निदेशक, पटना’ के पते पर स्पीड पोस्ट या कूरियर के माध्यम से भेज सकते हैं। इसके अलावा, आवेदक गर्दनीबाग स्थित बापू टावर कार्यालय में स्वयं जाकर व्यक्तिगत रूप से भी अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। निर्धारित अंतिम तिथि तक प्राप्त सभी शोध प्रस्तावों की जांच-पड़ताल के बाद एक विशेषज्ञ चयन समिति द्वारा योग्य फेलो का अंतिम चयन किया जाएगा।
यह फेलोशिप बिहार में गांधीवादी अध्ययन को बढ़ावा देने और युवा शोधकर्ताओं को एक मंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 31 अक्टूबर की नई अंतिम तिथि शोधार्थियों को अपने प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और इस अवसर का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त समय देती है।








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