Bihar MLC Result: हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद के 8 सीटों पर हुए चुनावों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। इन नतीजों में सबसे चौंकाने वाला परिणाम पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सामने आया है। यहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवल किशोर यादव को पराजित कर दिया।
नवल किशोर यादव इस सीट से पिछले 30 सालों से विधान पार्षद (MLC) थे, उनकी हार को एक बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
सगे भाई एक साथ विधान परिषद में, पार्टियां अलग
डॉ. संजीव कुमार की जीत से बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प स्थिति बन गई है। वे अब अपने बड़े भाई राजीव कुमार के साथ बिहार विधान परिषद में नजर आएंगे। राजीव कुमार पहले से ही कांग्रेस के टिकट पर विधान पार्षद हैं। खास बात यह है कि दोनों सगे भाई अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करेंगे, हालांकि वे एक ही गठबंधन (महागठबंधन) का हिस्सा हैं।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार की जीत ने न केवल एक 30 साल पुराने राजनीतिक गढ़ को तोड़ा है, बल्कि बिहार विधान परिषद में एक अनोखे पारिवारिक प्रतिनिधित्व की शुरुआत भी की है।
किस उम्मीदवार को मिले कितने वोट?
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणामों में वोटों का ब्योरा इस प्रकार रहा:
- बीजेपी के नवल किशोर यादव को 3,430 वोट मिले।
- आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार को 4,487 वोट मिले।
- जन सुराज की दिव्या ज्योति को 1,571 वोट प्राप्त हुए।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि डॉ. संजीव कुमार ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर निर्णायक बढ़त हासिल की।
पारिवारिक राजनीतिक विरासत
डॉ. संजीव कुमार और राजीव कुमार का परिवार राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय रहा है। उनके पिता आरएन सिंह परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और बिहार सरकार में मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। राजीव कुमार ने साल 2022 में कांग्रेस के टिकट पर बेगूसराय-खगड़िया स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी का चुनाव जीता था। अब उनके छोटे भाई डॉ. संजीव कुमार के भी विधान परिषद में पहुंचने से परिवार की राजनीतिक विरासत और मजबूत हुई है।
डॉ. संजीव कुमार का राजनीतिक सफर
आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार स्वयं भी खगड़िया जिले की परबत्ता विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव के बाद उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया था। आरजेडी में शामिल होने के बाद उन्होंने परबत्ता सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब विधान परिषद चुनाव में मिली यह जीत उनके राजनीतिक करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है।

















