

मुख्य बातें
सी एम कॉलेज के मानविकी संकाय की ओर से ‘विद्यापति स्मृति पर्व समारोह-2020 आयोजित
विद्यापति तेजस्वी कवि एवं सिद्धपुरुष थे,जिन्होंने हमें कर्म की शिक्षा दी:प्रो. भीमनाथ झा
महाविद्यालय विद्यापति की जन्मस्थली विस्फी को गोद लेकर विकसित करेगा: प्रो. विश्वनाथ
विद्यापति किसी क्षेत्र या भाषा के नहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय कवि थे : प्रो लावण्य कीर्ति
सभी व्यक्तियों के विद्यापति-साहित्य के अध्ययन-अध्यापन से होगा समाज का कल्याण :प्रो. अशोक
दरभंगा, देशज टाइम्स। विद्यापति हमें आशा व मानव उत्थान का संदेश देते हुये हमें कर्म की शिक्षा दी है। विद्यापति का वर्णन “हरि अनंत हरि कथा अनंता” सदृश्य है,जिन पर कुछ भी कहना कम ही होगा। उक्त बातें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रो. भीमनाथ झा ने मुख्य अतिथि के रूप में सी एम कॉलेज (darbhanga cm college) के मानविकी संकाय अंतर्गत मैथिली,संस्कृत, हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित “विद्यापति स्मृति पर्व समारोह-2020” में मुख्य अतिथि के रूप में कहा।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यापति संबद्ध काव्य-पाठ करते हुए कहा कि विद्यापति की शब्द साधना सिर्फ इस क्षेत्र में ही नहीं,वरन सुदूर तक गई है। उन्होंने हमें कर्म तथा मानव उत्थान की सीख देते हुये सत्य की विजय बताई है।
बतौर अध्यक्ष (darbhanga cm college) प्रधानाचार्य प्रो. विश्वनाथ झा ने कहा कि विद्यापति के शृंगारिक एवं भक्ति-भाव की कविता में प्रेम-भाव भरा पड़ा है।हमें परिवार,समाज,राष्ट्र तथा साहित्य से स्नेह करना चाहिए जो हमेशा आनंदित करते हैं।उन्होंने विद्यापति की जन्मस्थली विस्फी को सी एम कॉलेज द्वारा गोद लिए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि महाविद्यालय परिवार वहां सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक सहित सभी समस्याओं का मिलकर निदान करेगा।साथ ही महाविद्यालय में स्थापित हो रहे संगीत विभाग द्वारा विद्यापति संगीत एवं काव्य पर विशेष कार्य किए जाने की जानकारी दी।
मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग की पूर्व अध्यक्षा प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने कहा कि विद्यापति किसी खास क्षेत्र या भाषा के ही नहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय कवि थे।विद्यापति साहित्य एवं संगीत को सामान्य एवं अशिक्षित व्यक्ति भी बहुत अच्छी तरह जानता व समझता है।इसी कारण उनके लोकगीत,लोक संगीत एवं साहित्य जन-जन में व्याप्त है।उन्होंने विद्यापति के कई गीतों का गायन करते हुए बताया कि विद्यापति की रचनाओं में लोकधुन, लोकवाद्य-यंत्रों की काफी चर्चा है।उनके पद्यों में भाव- भक्ति मिश्रित हैं जो हमें अंदर से आनंदित करती हैं।
सम्मानित अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के प्राध्यापक प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि सभी व्यक्तियों को विद्यापति साहित्य एवं संगीत को पढ़ने- समझने की आज जरूरत है। विद्यापति की रचनाएं श्रृंगार एवं भक्ति परक हैं जो प्राकृत, मैथिली,संस्कृत तथा अबहट्ठ भाषा में रचित हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी से पुरस्कृत व आर एन कॉलेज,पंडौल के प्रधानाचार्य प्रो. विभूति आनंद ने कहा कि विद्यापति स्वयं आंदोलन स्वरूप हैं जो आज भी हमारा नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने मिथिला में मुगल के प्रभाव को कम करने हेतु आमलोगों को आंदोलित किया था।विद्यापति साहित्य आज भी सामायिक है,क्योंकि का व्यक्तित्व सार्वजनिक है।ऐसे आयोजनों से मैथिली का काफी विकास हुआ है और विद्यापति समारोह देश-विदेश में भी प्रसिद्ध हुआ है।
विषय प्रवर्तन करते हुए अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. इंदिरा झा ने कहा कि कवि विद्यापति को मिथिला सहित बंगाल आदि भी अपना अधिकार मानता रहा है जो उनकी लोकप्रियता का प्रतीक है।विद्यापति पर बंगाल का भी प्रभाव रहा है। यद्यपि विद्यापति की कुछ रचनाओं का अंग्रेजी अनुवाद हुआ है,पर आज जरूरत है उनकी सभी रचनाओं का अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं में अनुवाद हो। साथ ही मिथिलाक्षर के विकास का भी कार्य होना जरूरी है।
इस अवसर पर सिक्की कलाकार राजेश कुमार की ओर से (darbhanga cm college) सिक्की कला द्वारा निर्मित विद्यापति सहित अन्य महापुरुषों के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। अतिथियों द्वारा विद्यापति के चित्र पर पुष्प एवं माला अर्पण तथा दीप प्रज्वलन द्वारा कार्यक्रम का आरंभ हुआ।अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृतिचिह्न प्रदान कर किया गया।पीजी संगीत विभाग के छात्रों की ओर से विद्यापति के गोसावनी गीत- “जय जय भैरवी असुर भयावन–“का गायन किया गया।
प्रो. इंदिरा झा के संचालन में आयोजित समारोह में आगत अतिथियों का स्वागत संस्कृत विभागाध्यक्ष सह समारोह के संयोजक (darbhanga cm college) डॉ.आर एन चौरसिया ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो अखिलेश कुमार राठौर ने किया।इस अवसर पर मैथिली विभागाध्यक्षा प्रो रागनी रंजन,प्रो मंजू राय,डॉ. प्रीति कनोडिया, प्रो. एहतेशामुद्दीन,डॉ.अब्दुल हई, डॉ.संजीत कुमार झा,डॉ. रूपेंद्र झा,डॉ. अखिलेश कुमार विभू,प्रो. अमृत कुमार झा,डॉ. विजयसेन पांडे,डॉ. संजय कुमार,डॉ.मनोज कुमार सिंह,प्रो. रीतिका मौर्य, प्रो. ललित कुमार,डॉ. डोगरा, स्वयंसेवकों की ओर से नीरज कुमार, मो. मोवाज,राकेश कुमार,राजनाथ पंडित, पुरुषोत्तम कुमार चौधरी, मो. आफताब आलम,अरबाज खान,जयप्रकाश कुमार साहू, अंकित कुमार, विकास गिरी आदि सहित 70 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे।



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