

जाले। कृषि विज्ञान केंद्र जाले में आत्मा दरभंगा की ओर से संपोषित (Agricultural scientists call on the farmers in the jaley) दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक वार्ता का शुभारंभ दीप प्रज्वलित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अवकाश प्राप्त वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. रेयाज अहमद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन
से किसानों को बहुत अत्यधिक आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है,जलवायु परिवर्तन से मुकाबला के लिए किसानों को चाहिए की कृषी को नए पद्धति एवं तकनीको को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निचली भूमि में जहां हम पारंपरिक रूप से धान की खेती करते हैं तथा अतिवृष्टि के कारण खेत पानी से डूब जाता है। जिन भूमि में अगस्त से लेकर नवंबर माह तक 2 फीट से अधिक जलजमाव रहता हो वहां पर सिंघाड़े की खेती से अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं वहीं पर जो कि जिन किसानों के खेतों से सितंबर माह तक पानी निकलता है वह अपने खेतों में सब्जियों की खेती मूली की खेती साग की खेती कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं तथा रवि की फसल समय से कर सकते हैं।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के केंद्राधीक्षक डॉ दिव्यांशु शेखर ने किसानों से धान की फसलों की निगरानी करने एवं उन में लगने वाले बीमारियों का समय से कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के सलाह से उपचारित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने बताया कि कोविड-19 के कारण प्रशिक्षण एवं प्रवीण परिभ्रमण कार्यक्रम कम हो पा रहे थे वह अब प्रारंभ हो गया है, कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रमों की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे कि उन्हें लाभान्वित किया जा सके इस मौके पर किसानों ने अपनी धान की फसलों में लग रहे विभिन्न बीमारियों के संबंध में पौधा रोग वैज्ञानिक डॉक्टर आर.सी. प्रसाद से सुझाव प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए उद्यान वैज्ञानिक डॉ कुमारी अंबा ने बताया इस कार्यक्रम में सिंघवारा एवं जाले प्रखंड के कृषक ने भाग लिया। कार्यक्रम में मृदा वैज्ञानिक डॉ. एपी राकेश समेत कृषि विज्ञान केंद्र के सभी कर्मी मौजूद थे।कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक भोला सिंह धीरेंद्र कुमार रेयाज अहमद रामनाथ महतो आदि मौजूद दिखे।।
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