
बिहार के सहरसा जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के बलवाहाट – कांठो स्थित बाबा मटेश्वर धाम मंदिर परिसर में नवनिर्माण के दौरान खुदाई में मिले अतिप्राचीन मूर्तियों को रविवार को मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभ मुहूर्त में स्थापित किया गया।




पिछले महीनें नवनिर्माण हेतु नींव खुदाई के दौरान मलबे में लगातार कई पुरातात्त्विक अवशेष मिले। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार भगवान सूर्य के दो मूर्ति व विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की अतिप्राचीन मूर्तियां मिली।
मंदिर परिसर में स्थित नवनिर्मित बाबा मटेश्वर धाम संग्रहालय में सभी अतिप्राचीन मूर्तियां को स्थापित सासंद दिनेश चंद्र यादव एवं न्यास समिति अध्यक्ष सह पूर्व विधायक डॉ अरुण कुमार ने किया।
बाबा मटेश्वर का इतिहास काफी गौरवशाली एवं समृद्धशाली रहा है।बाबा मटेश्वर धाम के भू-गर्भ में अनगिनत अमूल्य धरोहर छिपा हुआ है। समय समय पर खुदाइ में कई पुरातन काल के मूर्तियां, शिला, व पत्थर मिलते रहते हैं। बाबा मटेश्वर धाम का शिवलिंग अद्भुत व अनोखा है।
यहां की संस्कृति व विरासत दुनिया को अपनी और आकर्षित कर सकती है। वर्ष 2003 में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती बाबा मटेश्वर नाथ का दर्शन करने पहुंचे एवं दर्शनोपरांत उन्होंने कहा कि ऐसा अद्भुत शिवलिंग हम पहली बार देखें हैं, जो पूरे विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं है।
बाबा मटेश्वर धाम मे 2005 में खुदाई में भगवान शनिदेव का दिव्य व अतिप्राचीन मूर्ति मिला। जानकारों के अनुसार यह मंदिर पहले काले पत्थर से निर्मित था जिसे औरंगजेब शासनकाल में ध्वस्त कर दिया गया, जिसका अवशेष जीर्ण-शीर्ण अवस्था में मंदिर परिसर में रखा गया है।
सासंद दिनेश चंद्र यादव ने कहा कि भविष्य में भगवान् सूर्य व मां सरस्वती की के लिए भी मंदिर बनवाया जाएगा। बाबा मटेश्वर धाम के विकास के लिए हम कृत-संकल्पित हैं।






