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मार्च, 12, 2026
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मोदी ने कसा तंज कहा, IAS अधिकारियों से खैनी मलवाते थे लालू, ऐसी ही अफसरशाही चाहते हैं तेजस्वी, पढ़िए कांग्रेस से क्या जानना चाहते है मोदी?

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मुख्य बातें:

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-यह अब बिहार में संभव नहीं हो सकेगा
-पिछड़ों के लिए भाजपा ने किए काम

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पटना। राजद पर लगातार हमलावर रहे बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने एक बार फिर बिहार में अफसरशाही के मुद्दे पर राजद को करारा जवाब दिया है।

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सुशील मोदी ने मंगलवार को यहां पार्टी कार्यालय में प्रेसवार्ता में कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जो सवाल पूछते हैं वह जवाब देने योग्य नहीं होता है। वह कहते हैं कि बिहार में अफसरशाही हावी है लेकिन उनके पिता लालू प्रसाद के कार्यकाल में अफसर कैसे काम करते थे, यह किसी से छुपा हुआ नहीं है।

उन्होंने कहा कि लालू आईएएस अधिकारियों से पिकदान उठवाते थे, खैनी मलवाते थे। तेजस्वी ने यही सब देखा है। इसलिए वह शायद ऐसी ही अफसरशाही चाहते हैं, जिसकी जरूरत बिहार को नहीं है।

सुशील मोदी ने कहा

देश में दलितों, पिछड़ों के लिए या ऊंची जाति में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए किसी ने कुछ काम किया है तो वह नरेन्द्र मोदी की सरकार ने किया है या जिस गठबंधन में भाजपा रही है, उस सरकार ने किया है।

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राजद-कांग्रेस कभी भी पिछड़ों का विकास नहीं कर सकती है। इस दौरान लालू प्रसाद को पिछड़ों का नेता बताए जाने पर उन्होंने कहा कि अगर वह पिछड़ों के इतने हिमायती थे तो क्यों 23 साल तक बिहार में पंचायत चुनाव नहीं कराया।

बाद में चुनाव कराया भी तो एससी-एसटी तबके के लिए आरक्षण की व्यवस्था नहीं की, जबकि स्पष्ट प्रावधान है कि पिछड़ों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करें। यह हमारी सरकार थी जिसने बिहार पंचायत चुनाव में पिछड़ों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की ताकि वह भी समाज में आगे बढ़ सकें।

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मैं कांग्रेस से यह जानना चाहता हूं

आज 16 सौ से ज्यादा मुखिया अतिपिछड़ा समाज से बने हैं तो यह एनडीए सरकार की ही देन है। उन्होंने कहा कि आज मेडिकल कॉलेज में ओबीसी कोटा, केंद्रीय विद्यालय, मिलिट्री स्कूलों और नवोदय में 27 फीसदी आरक्षण पिछड़ों के लिए आरक्षित किया गया है। इसके कारण चार लाख पिछड़े वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की व्यवस्था नरेंद्र मोदी सरकार ने की है।

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उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस से यह जानना चाहता हूं कि उन्होंने क्यों नहीं पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक अधिकार दिए? जबकि वह खुद को पिछड़ों का हिमायती बताती रही है। इस दौरान लंबे समय तक नीतीश कुमार के साथ काम कर चुके सुशील मोदी से जब पीएम मेटेरियल पर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली। कहा कि यह कोई मुद्दा नहीं है।

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