



मैंने तो जिंदगी बिता डाली, इंसाफ के लिए तेरी आंखों से सच्चाई का पर्दा न उतरा पुलिसवालों के लिए वसूली अब वैध की श्रेणी में है। चाहे नो इंट्री में बैलगाड़ी लेकर घुसें या ट्रक लेकर इनपर कोई फर्क नहीं पड़ता। नोटबंदी को खोल दीजिए पूरे सड़क को अपनी जागिर समझिए। कोई कायदा कानून, कोई अफसर इन पुलिस वालों पर आज तक लगाम नहीं लगा सके। पूरा माल बोरे में रखने की इनकी आदत अब पुरानी हो चुकी। लगी रहती हैं कतारें सारा दिन यहां-वहां पर गरीब सोचता है, जज फैसला देगा आज मुझ पर पर वक्त की मार से गरीब की दुनिया उजड़ जाती है जब अमीर भर देता है झोली जज के घर जाकर। हालत यही है, कमीशन के खेल में कौन कहां किसके पास जाकर रूक जाता है कहना समझना मुश्किल है। क्यूं लगती है कोर्ट और क्या करते हैं जज यहां केवल तारिख का दिखावा करने का, जब होता है मन उनका चमचा बैठा उनका, बहकाने को और बात वो बनाता है, इक लाचार मुझ सा, अपनी तकलीफ को , सहते हुए मर जाता है। वाह मेरे देश, तुझ को सलाम यहां कानून अंधा है, या अंधा कानून है मैंने तो जिंदगी बिता डाली, इंसाफ के लिए तेरी आंखों से सच्चाई का पर्दा न उतरा। हालात यही है कोई भी अधिकारी आएं, क्या फायदा तेरा , बूत बन के रहने का अमीरों के फैसले हो जाते हैं, यहां पल में गरीब बेचारा, हर पल सताया जाता है हराम की दौलत समझ लेते हैं वकील उनकी तभी तो उनका सारी रात जश्न मनाया जाता है।





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