

जाले। कृषि वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली कृषि विज्ञान केंद्र जाले (Krishi Vigyan Kendra) के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर के निर्देशन में कड़ी मेहनत के बाद भिंडी की नई प्रजाति लाल भिंडी का उत्पादन प्रारम्भ हो गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र जाले के बीज प्रक्षेत्र में लाल भिंडी की खेती प्रारम्भ होने से अब किसानों की यह लाल भिंडी की विज सुलभ होगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी केंद्रधीक्षक डॉ.दिव्यांशु शेखर ने बताया की यह कमाल भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी की ओर से किया गया है, सबसे खास बात है कि यह भिंडी हरी होने की बजाय लाल है और इसी कारण इसका नाम लालिमा भिन्डी रखा गया है।
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान की यह सफलता काफी खास है। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह भिंडी एंटी ऑक्सीडेंट, आयरन और कैल्शिय सहित तमाम पोषक तत्वों से भरपूर है, इसकी कई किस्मों को वैज्ञानिकों ने विकसित किया है,आम भिंडी के मुकाबले इसकी कीमत ज्यादा है,काशी लालिमा भिंडी की अलग-अलग किस्मों की कीमत 100 से 500 रुएय किलो तक बताया गया है।
जाले कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक ने इस लाल भिन्डी के प्रजाति के बीज उत्पादन के लिए इसकी खेती प्रारम्भ किया है,जिससे किसान इस केंद्र के उत्पादित बीज से उत्पादन उत्पादन करेंगे।
जानकारी के अनुसार, भारत में हरी भिंडी ही प्रचलन में है, लाल रंग की भिंडी पश्चिमी देशों में मिलती है, और भारत भी वहीं से अपने उपयोग के लिेए इसे मंगाता रहा है, अव देश में इसकी किस्म विकसित हो जाने के बाद इसे आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भारत के खेतो में अब यहां के किसान लाल भिंडी की खेती करेंगे। डॉ. दिव्यांशु शेखर ने बताया कि 1995-96 में ही इसके लिए काम शुरू हो गया था,लेकिन अब जाकर सफलता मिली है। यह पुछेजाने पर की किसानों को इसका बीज कैसे सुलभ होगी।
उन्होंने बताया कि जाले कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को काशी लाल भिन्डी का बीज भेजेगा, जहां से इस बीज को किसान प्राप्त कर सकेंगे।
काशी लालिमा भिंडी का बीज आम लोगों के लिए दिसंबर से मिलने लगेगा। इससे किसानों को लाभ होगा ही, साथ ही आम लोग भी इससे भरपूर पोषक तत्व पाएंगे।
photo caption : कृषि विज्ञान केंद्र जाले की ओर से विज प्रक्षेत्र में लाल भिंडी की खेती शुरू। खेत से टूटा पोष्टिक लाल भिंडी।




