

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शहीद स्मारक तारापुर, मुंगेर में अमर शहीदों की मूर्ति का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी।
वायसराय लार्ड इरविन और महात्मा गांधी के बीच इंग्लैंड में बातचीत हुई लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक घटना में शहीद हुए लोगों की मूर्तियों को लगाने का निर्णय प्रदेश की राजग सरकार ने किया। इसके लिए 77 लाख 50 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई और सात सितंबर 2018 से मूर्ति का निर्माण कार्य शुरू किया गया।
सीएम ने कहा कि पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने भी हमसे बातचीत की थी और इसकी बेहतरी की बात रखी थी। 8 दिसंबर 2021 को हमलोगों ने निर्माण स्थल और थाना को जाकर देखा। उसके बाद चारों तरफ से बाउंड्री बनाने के साथ-साथ इसको और बेहतर ढंग से बनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी 2022 तक इसे पूर्ण करने का निर्णय लिया गया था। 90 वर्ष पूर्व 15 फरवरी 1932 को यह घटना घटित हुई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बिहार के तारापुर में एक साथ 34 लोग शहीद हुए थे। अब प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी को तारापुर शहीद स्मारक पर राजकीय समारोह आयोजित किया जाएगा। ताकि नई पीढ़ी को इन सब चीजों की जानकारी हो सके और लोगों को गौरव महसूस हो। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने शहीदों को याद रखना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग से भी हम यह कहेंगे कि आजादी की लड़ाई में तारापुर के शहीदों के बारे में भी बच्चों को जानकारी दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन 21 अमर शहीदों के नाम का पता नहीं चल सका उन अज्ञात शहीदों की सांकेतिक मूर्ति निर्माण करने का निर्णय किया गया। थाना परिसर को भी विकसित करने का निर्णय किया गया। अब 21 अमर शहीदों के म्युरल का निर्माण 45 लाख 67 हजार रुपये की लागत से किया जाएगा। अब इस योजना कुल लागत एक करोड़ 28 लाख रुपये हो गई है।

