

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने भोपाल के सागर जिले में नसबंदी फेल होने के कारण एक दंपत्ती के यहां पांचवी संतान के जन्म लेने पर संज्ञान लिया है।
मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने कलेक्टर तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सागर से एक माह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि क्या इस महिला को कोई मुआवजा दिया गया है या नहीं ?
सागर जिले के गौरझामर के समीपस्थ ग्राम बिजोरा निवासी सुनील सौर और पत्नी रानी सौर की पहले से ही चार संतान हैं, जिनमें तीन लड़कियां और एक लड़का है। चौथी संतान लड़का होने के बाद उनका पारिवारिक मकसद पूरा हो गया था। इसके बाद उन्होंने परिवार नियोजन नसबंदी कराने की ठानी और सुनील ने देवरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 जनवरी 2020 को आयोजित शिविर में पत्नी रानी का नसबंदी आपरेशन करा दिया।
सुनील और रानी मेहनत मजदूरी करते हुए वह परिवार को जैसे-तैसे चला रहे थे। उन्हें क्या पता था कि पत्नी की नसबंदी फेल हो जाएगी और हुआ भी यही। उन्हें जब गर्भ में पल रहे बच्चे का कुछ महीनों बाद चला, तो इसकी जांच व शिकायत करने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवरी पहुंचे। वहां उन्हें दिलासा देते हुए कहा गया कि बच्चा हो जाने दो, शासन की तरफ से आर्थिक मदद दी जाएगी।
नसबंदी आपरेशन से करीब तेरह महीने बाद 19 जनवरी 2021 को सुनील के घर एक पुत्री ने जन्म लिया। सुनील के परिवार में अब चार पुत्री व एक पुत्र हैं। लाकडाउन में कोरोना के दौरान हुई इस घटना ने परिवार को हिलाकर रख दिया। अब उन्हें पांचवी अनचाही लड़की (नसबंदी फेल होने के कारण) की परवरिश की चिन्ता सता रही है। उसकी मांग है कि सरकार उसे शीघ्र ही मुआवजा दे, जिससे वह अनचाही लड़की की भी परवरिश कर सके।



