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फ़रवरी, 22, 2026
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बिहार में प्रति व्यक्ति आय 50,555 रुपए, बना मछली उत्पादन में बना आत्मनिर्भर, वर्ष 2020-21 में 2.5% बढ़ी अर्थव्यवस्था,

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बिहार विधानमंडल में शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री-सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने राज्य सरकार का सोलहवां आर्थिक सर्वेक्षण (2021-22) प्रस्तुत किया। बिहार की अर्थव्यवस्था का आकार कोरोना काल में भी ढाई फीसदी बढ़ गया है।

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भारत सरकार के ताजा नेशनल एकाउंट डाटा से इसका पता चलता है। 2019-20 में प्रदेश का राज्य सकल घरेलू उत्पाद चार लाख नौ हजार 645 करोड़ का था, जो 2020-21 में बढ़कर चार लाख 19 हजार 883 करोड़ का हो गया है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आकार की यह गणना स्थिर मूल्य के आधार पर की गई है।

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अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के कारण बिहारवासियों की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ी है। स्थिर मूल्य पर लगभग 335 रुपये का इजाफा हुआ है। 2019-20 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय 33,979 रुपये थी, जो 2020-21 में बढ़कर 34,314 रुपये हो गई। वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 1283 रुपये बढ़ी है। वर्तमान मूल्य पर बिहार की प्रति व्यक्ति आय 49,272 रुपये थी जो 2020-21 में 50,555 रुपये हो गई।

वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार का कुल व्यय गत वर्ष की अपेक्षा 13.4 प्रतिशत बढ़कर 1,65,696 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें से 26,203 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय था और 1,39,493 करोड़ रुपये राजस्व व्यय।

वर्ष 2020-21 में सामान्य सेवाओं, सामाजिक सेवाओं और आर्थिक सेवाओं पर राज्य सरकार का व्यय गत वर्ष से क्रमश: 11.1 प्रतिशत, 10.4 प्रतिशत और 10.8 प्रतिशत बढ़ा। वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार का राजस्व व्यय 1,28,168 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 36,735 करोड़ रुपये था।

वहीं, 2020-21 में राज्य सरकार का अपने कर और करेतर स्रोतों से राजस्व 2019-20 के 33,858 करोड़ रुपये से बढ़कर 36,543 करोड़ रुपये रहा।

बिहार में हाल के वर्षों में आशाजनक औद्योगिक विकास हुआ है। साल 2017 से 2021 के बीच राज्य को कुल 54,761 करोड़ रुपये निवेश के 1,918 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। तीन सर्वाधिक आकर्षक उद्योग इथेनॉल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा हैं। दिसंबर 2021 तक ईथेनॉल क्षेत्र में कुल 32,454 करोड़ रुपये निवेश वाली 159 इकाइयों को प्रथम स्तर की अनापत्ति दी गई।

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ईथेनॉल के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने ईथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2021 सूत्रबद्ध की है। राज्य में चिकित्सा संबंधी प्रयोजनों के लिए ऑक्सीजन के उत्पादन में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने ऑक्सीजन प्रोत्साहन नीति 2021 भी लागू की है।

बिहार की अर्थव्यस्था में कृषि
का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। बिहार में कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्रों का लगातार विकास हुआ है। वर्ष 2019-20 में सकल शस्य क्षेत्र (जीसीए) 72.97 लाख हेक्टेयर था और फसल सघनता 1.44 प्रतिशत थी। गत पांच वर्षों में कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्र 2.1 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा। उप-क्षेत्रों के बीच पशुधन एवं मत्स्यपालन की वृद्धि दर क्रमशः 10 प्रतिशत और 7 प्रतिशत रही है। वर्ष 2020-21 में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 17.95 लाख टन होने का अनुमान है।

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वर्ष 2020-21 में 6.83 लाख टन मछली का उत्पादन
होने से राज्य मछली उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है। बिहार में दूध का कुल उत्पादन 2020-21 में 115.01 लाख टन था। कृषि क्षेत्र के और अधिक विकास के लिए कृषि विभाग द्वारा एन नया मोबाइल ऍप ‘बिहान’ शुरू किया गया है जो कृषि संबंधी विभिन्न डिजिटल उपयोगों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ला देता है।

राज्य में कामकाजी उम्र वाले लोगों की बड़ी संख्या
और उनमें से अधिकांश को कृषि सहित अनौपचारिक क्षेत्र में लगा देखते हुए राज्य सरकार ने अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की है।

इन योजनाओं के लाभार्थी प्रवासी मजदूर, बाल मजदूर, और निर्माण मजदूर हैं। जैसे, बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा की स्थिति का नियमन) नियमावली 2015 के तहत 2016-17 से 2020-21 तक कुल मिलाकर 4.28 लाख मजदूर निबंधित हुए हैं।

वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार ने 11.10 लाख निर्माण मजदूरों को कुल 538 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। इसके अलावा विभिन्न आयोगों के जरिए भी राज्य सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। वर्ष 2020-21 में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने 4586 रिक्तियों के लिए विज्ञापन दिया था जो गत चार वर्षों में सर्वाधिक था।

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परिवहन विभाग ने नागरिक-हितैषी सेवाओं, पथ सुरक्षा आदि में सुधार लाने के लिए हाल के वर्षों में अनेक पहल किए हैं और 2018 से 2020 तक के तीन वर्षों के अंदर पांच राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं। गत दशक (2011-20) के दौरान देश में परिवहन, भंडारण एवं संचार क्षेत्र में सर्वाधिक 14.4 प्रतिशत वृद्धि दर बिहार में दर्ज हुई।

यह सड़क एवं पुल क्षेत्र में गत 15 वर्षों के दौरान
किए गए उच्च सार्वजनिक निवेश का परिणाम है। प्रति 1000 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर सड़कों की लंबाई के मामले में केरल (6617 किमी) और पश्चिम बंगाल (3708 किमी) के बाद बिहार (3086 किमी) का ही स्थान है।

राज्य में ग्रामीण सड़क नेटवर्क 2015 के 57,388 किमी
से बढ़कर 2021 में 1,02,306 किमी हो गया है। अत्याधुनिक भवनों के निर्माण के लिए भवन निर्माण विभाग का बजट 2008-09 के 260 करोड़ रुपये से 20-गुने से भी अधिक बढ़कर 2020-21 में 5321 करोड़ रुपये हो गया। साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अधिसंरचना के तेज विकास के जरिए मजबूत हुई है।

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