

बिहार में बीते 24 घंटे के दौरान 52 स्टूडेंट्स की यूक्रेन से घर वापसी हुई है, जिसमें दस पटना के रहने वाले हैं। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल के मुताबिक अब तक यूक्रेन से बिहार के 174 बच्चों की सकुशल वापसी हो गई है।
संजय अग्रवाल ने बताया कि घर वापसी के बाद अब वह दहशत से बाहर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पीएम मोदी ने जिस तरह हम सभी बच्चों को वहां से निकाला है, यह गर्व की बात है। केंद्र सरकार ने बम और मिसाइलों के धमाके के बीच हमें वहां से निकाला । हम सभी मौत के मुंह से निकलकर घर आए हैं। छात्रों का कहना है कि अब उन लोगों की सलामती की दुआ कर रहे हैं जो यूक्रेन में उनके संपर्क में आए।
संजय ने कहा कि पटना के बाद पूर्वी चंपारण में एक छात्रा शिल्पा कुमारी, पश्चिमी चंपारण में अजीत कुमार सिंह, साहेब आलम, मनीष कुमार सिंह, वैभव सागर की वापसी हुई है। अररिया में दिव्यांशु रंजन, तस्कीन फरहत, अंकित आनंद की वापसी हुई है। मधुबनी में अरिशद अशरफ इरफानी की वापसी हुई है। समस्तीपुर में अंशु कुमार, सौरव कुमार, दीपक कुमार, मनीष कुमार की वापसी हुई है।
सारण में अभिनव रंजन, राहुल कुमार सिंह, पवन कुमार, संजीव कुमार की वापसी हई है। गोपालगंंज में दीपू कुमार मांझी की वापसी हुई है। कटिहार में अंकित कुमार, नितेश कुमार, निक्की, रवि कुमार सिंह की वापसी हुई है। भागलपुर में सौम्या चंद्रा की सकुशल वापसी हुई है। मधेपुरा में अभिमन्यु राज और ओमप्रकाश की वापसी हुई है।
उन्होंने कहा कि बेगूसराय में 24 घंटे के दौरान चार छात्रों की वापसी हुई है। पूर्णिया में जेवा रहमान और कुणाल की वापसी हुई है। सिवान में राघवेंद्र प्रताप, गया से मंदीप सत्यार्थी, सौरव प्रियांक, अनामिका कुमारी की वापसी हुई है। किशनगंज में सद्दाम हुसैन, फिरोज आलम, लखीसराय से शिवानी की वापसी 24 घंटे में हो चुकी है। अब तक पटना में सबसे अधिक स्टूडेंट्स की वापसी हुई है।
इसके बाद सारण में नौ स्टूडेंट्स वापस आए हैं। अब तक सीतामढ़ी, समस्तीपुर में सात-सात स्टूडेंट्स की यूक्रेन से घर वापसी हुई है। वैशाली में पांच, पूर्वी चंपारण में पांच, गोपालगंज में आठ, समस्तीपुर में सात, सहरसा में छह, पूर्णिया में पांच, भागलपुर में छह और बेगूसराय में अब तक पांच स्टूडेंट्स की वापसी हो चुकी है।
मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए मुजफ्फरपुर जिले से कुल 44 छात्र व छात्राएं यूक्रेन गए थे। इसमें अब तक 13 छात्र व छात्राएं लौट चुके है। रोमानिया व पोलैंड में 17 बच्चे फंसे हैं। वहीं, 12 बच्चों से संपर्क नहीं हो सका है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने सूची जारी किया है।
वहीं, नालंदा के 28 छात्र अब भी यूक्रेन बॉर्डर के पास फंसे हुए हैं। हालांकि, गुरुवार की सुबह वहां के स्थानीय अधिकारियों ने रह रहे छात्रों और अन्य भारतीयों का निबंधन किया है। इससे वहां के छात्रों को जल्द अपने व जगी हैं। परिजन भी वहां फंसे छात्रों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
यूक्रेन बोर्डर के पास रोमानिया के सिरेप बॉर्डर में रह रहे चंद्रमणि ने बताया कि बिहार और केंद्र सरकारों की मदद से कैंप में लगातार स्थानीय अधिकारी लोगों की खोज खबर ले रहे हैं। भोजन और पानी का भी प्रबंध बेहतर है। हालांकि, यहां साउथ इंडियन डिश दी जा रही है। अन्य व्यवस्था भी दुरुस्त है।
तीसरे दिन लौटने की उम्मीदें हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय अधिकारियों ने भारत सरकार द्वारा हवाई जहाज बढ़ाए जाने की बात कही है। इस कारण दो दिनों में भी बिहारी छात्र अपने वतन लौट सकते हैं।
वहीं, गोपालगंज से एक खबर आ रही है। यूक्रेन की हालत खराब है। एक भारतीय छात्र की मौत के बाद यूक्रेन में रह रहे छात्रों के अभिभावकों की नींद उड़ी है। जंग के कारण फंसे जिला के छात्रों के परिजनों से डीएम डॉ नवल किशोर चौधरी लगातार संपर्क में है।
गुरूवार को पत्रकारों को डीएम ने बताया कि जिले में अभी तक 32 छात्रों को यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिली थी। 18 छात्रों की सकुशल वापसी हो चुकी है। शेष छात्रों में से अधिकांश यूक्रेन के निकटवर्ती देश रोमानिया में 1, पोलैंड में 2,हंगरी में 5 में सुरक्षित रूप से पहुंचकर भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। वहां उनके रहने तथा भोजन की व्यवस्था के साथ उन्हें फ्लाइट से भारत भेजने की कार्रवाई की जा रही है। जैसे ही वे भारत आएंगे। उन लोगों को सरकारी खर्चे से घर लाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बाकी चार छात्रों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।डीएम ने इस मौके पर अभिभावकों को राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं उन्होंने ऐसे विषम परिस्थिति में धैर्य से काम करने की सलाह दी।



