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फ़रवरी, 12, 2026
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दरभंगा के बेनीपुर में 284 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन माह से चावल की आपूर्ति ठप

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बेनीपुर, सतीश चंद्र झा। सरकार भले ही आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन के लिए पौष्टिक आहार के रूप में फोर्टीफाइड (गुणवत्तापूर्ण) चावल राज्य खाद्य निगम के माध्यम से आपूर्ति करती हो, लेकिन धरातल पर पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण पिछले 3 माह से चावल की आपूर्ति ठप है।

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विभागीय सूत्रों के अनुसार
बेनीपुर प्रखंड क्षेत्र में कुल 284 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है, जहां प्रतिदिन 35 बच्चों को पका पकाया भोजन मीनू के अनुसार दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए पूर्व में ₹ 21000 मासिक आंगनवाड़ी सेविका के खाते में दी जाती थी। इसके माध्यम से आंगनवाड़ी सेविका की ओर स्थानीय बाजार से सभी सामानों का कार्य कर बच्चों को प्रतिदिन के हिसाब से पौषक आहार खिलाया जाता था।

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लेकिन, बिहार सरकार की ओर से पिछले दिसंबर माह से बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में फोर्टीफाइड चावल राज्य खाद्य निगम के माध्यम से आपूर्ति की जाने की व्यवस्था की गई। लेकिन दिसंबर माह का आवंटन वर्तमान समय में मार्च महीने में आंगनबाड़ी सेविकाओं को 48 किलो वजन कर दी गई।

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लेकिन, विभागीय सूत्रों के अनुसार जनवरी, फरवरी एवं मार्च महीने का 1199 क्विंटल चावल की आपूर्ति जिला खाद्य निगम की ओर से बेनीपुर खाद्य निगम के गोदाम तक पहुंचाया गया। इसके लिए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी के माध्यम से बेनीपुर बाल विकास परियोजना कार्यालय की ओर चावल एवं किराया मद में ₹540313 का भुगतान भी कर दिया गया है, लेकिन वर्तमान समय में चावल का उठाव करने के लिए बाल विकास परियोजना का कोई भी पदाधिकारी आगे नहीं आ रहे हैं।

इस संबंध में बताया जा रहा है कि 1199क्विंटल जो कि लगभग 2200 सौ बोड़े होंगे उसे रखने के लिए परियोजना के पास अपना कोई भवन नहीं है। वह खुद पर उधार के भवन में अपना कार्यालय संचालित कर रहे हैं । साथ ही गोदाम से आंगनवाड़ी सेविका के केंद्र तक मजदूरी और भाड़ा का भुगतान आखिर कौन करेगा।

इस संबंध में पूछने पर सीडीपीओ लक्ष्मी रानी ने बताया
कि स्थानीय स्तर पर न तो विभाग को चावल रखने की जगह है और ना ही किराया भाड़ा या मजदूरी देने के लिए कोई राशि आवंटित है। इसके लिए उच्च अधिकारी से मार्गदर्शन की मांग की गई है। दूसरी ओर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से सरकारी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो दूरभाष संख्या बंद पाई गई।

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