



संजय कुमार राय, अपराध ब्यूरो प्रमुख देशज टाइम्स। दरभंगा में भू-माफिया का सिंडिकेट चल (Syndicate of land mafia running in Darbhanga) रहा है। यह बात किसी से छुपी नहीं है। प्रशासन से लेकर राजनेता तक। हर कोई इस बात से इत्तेफाक ही नहीं रखते, इसमें कहीं ना कहीं सहभागी भी दिखते, बनते रहे हैं। यही वजह है, शहर में भू-माफिया का कहर टूट रहा है। जमीन किसी और की और उसे बेच रहा है कोई और, उसकी खरीद कर रहा कोई और। इसमें, पुलिस की मदद भी ली जाती
है। पुलिस की मदद और माथे पर बड़े नेता का हाथ की मदद से भू-माफिया आपकी, किसी की भी जमीन पर कब्जा जमा रहे हैं। शहर का कोई कोना इससे अछूता नहीं। हद यह, प्रशासन की हदें, उसकी लक्ष्मण रेखा इन कब्जाधारी भू-माफिया का कुछ बिगाड़ नहीं पा रही। साप्ताहिक जनता दरबार भी इन दबंग युवकों की भीड़ के सामने शराब और कबाब की ताकत में गुम होती दिख रही है। तभी तो, जमीन किसी और की, जमीन आपकी और उसे बेच रहा कोई और? पढ़िए देशज टाइम्स के अपराध ब्यूरो प्रमुख संजय कुमार राय की यह एक्सक्लूसिव खबर, इसमें हर कोई बेनकाब हैं। प्रशासन के आला अफसर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। तभी तो रातों-
रात ईंट की दीवारें नहीं दे सकने की स्थिति में टीन और लोहे का घेरावा कर किसी की भी जमींन पर ये भू-माफिया कब्जा जमा रहे हैं। देखिए यह वीडियो भी, जो किसी की भी जमीन पर खड़े इन माफिया की हकीकत बयां कर रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट
जमीन किसी और की बेच रहा कोई और? जी हां, यह बिल्कुल सत्य है। हम बात कर रहे हैं, दरभंगा शहर की। इस शहर में भू-माफिया की कमी नहीं है। दारू पीकर रंगबाजी करना और जमीन कब्जा करना इनकी आदत और नियति में है। ऐसे लोग जो बाहर हैं या उनकी जमीन दरभंगा में कहीं है तो भू-माफिया की तय मानिए उसपर नजर गड़ी है।
…और देखते ही रह जाते हैं जमीन के मालिक
जमीन किसी और की महदा कोई और बनाया और दावा ठोका। यही नहीं, मौका देखते ही उस जमीन पर कब्जा जमाया और जमीन मालिक देखते रह जाते हैं। अब मालिक को अंचल, डीसीएलआर, डीएम के यहां दौड़ना पड़ता है। और दौड़ते- दौड़ते वह इतने थक जाते हैं। नतीजा यह निकलता है, फिर भू-माफिया थोड़ा-बहुत पैसा देकर जमीन मालिक से समझौता करते हैं और थक हार कर जमीन मालिक उस जमीन की रजिस्ट्री कर देते हैं।
सूत्रों की मानें तो इस खेल में जिला के एक माननीय का भू-माफिया के सर पर हाथ भी रहता है। इस जमीन में हुई कमाई का एक बड़ा हिस्सा उस माननीय के पास भी जाता है। इस कारण पुलिस भी भू-माफिया का साथ देती है। या फिर मजबूर हो जाती है।
अगर संबंधित ओपी अध्यक्ष या थानाध्यक्ष माननीय की अनदेखी करते हैं तो माननीय किसी अन्य मामले को लेकर उस थानाध्यक्ष को निलंबित करवा देते हैं। बड़े अधिकारी जांच करने की बजाय सीधे कार्रवाई कर देते हैं। व्यवस्था का बहुत कमजोर अंग जिला के वरीय पदाधिकारी हो गए हैं। गरीब या कमजोर लोगों को न्याय कौन देगा यह समझ नहीं आ रहा। इसका समाधान नहीं मिल पाता। जमीन से जुड़ी हुई कई दर्जन मामले इस कारण आपराधिक घटनाओं से लैस हो जाते हैं, जिसमें पुलिस या प्रशासन चाहकर भी कोई निर्णय नहीं कर पाती।
जनता दरबार लगता तो जरूर है मगर…?
सरकार के निर्णय के आलोक में सप्ताह में एक दिन सीओ और थानाध्यक्ष जनता दरबार लगाते जरूर हैं, पर मामले का निष्पादन नहीं होता है। लोग आते हैं, मायूस दिखते हैं। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार की ओर से अधिग्रहित सिन्हा होमियोपैथ कॉलेज की जमीन पर आधा सैदनगर बस गया।
सवाल बड़ा है…और जवाब नदारद
अब सवाल उठता है कि कैसे जमीन को लोग बेचा, कैसे रजिस्ट्री हुई और कैसे दाखिल-खारिज हो गया। जब सरकारी संपत्ति को ही भू-माफिया ने बेच दिया तो निःसहाय और कमजोर लोगों की कौन सुनेगा, यह दीगर बात, इसका समाधान करेगा कौन यह अलग मसला है। कारण, ऐसे कई मामले हैं। सूत्रों का कहना है कि नीचे से ऊपर तक अवैध उगाही होती है। भू-माफिया का हर ऑफिस में आदमी फिक्स है। ऐसे में न्याय की बात करना बेईमानी होगी।
बीती रात यह हुआ…इसे जान लीजिए
बीती रात एनएच महिंद्रा शो रूम और सेंट्रल स्कूल के पीछे भू-माफिया ने किसी व्यक्ति का कई कट्ठा जमीन कब्जा कर लिया है। इस दौरान शराब और कबाब दोनों की व्यवस्था की गई थी। दर्जनों युवक पहुंचकर शराब पिया फिर दीवाल जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जमीन पर खेल का अंश यह है…
बेला गुमटी के नजदीक खाली पड़ी 28 एकड़ जमीन दरभंगा राज की है। दरभंगा राज ट्रस्ट की ओर से इसमें तकरीबन 16 एकड़ जमीन लगभग 165 लोगों के हाथों कई साल पहले बेचा जा चुका है। अब इस जमीन पर हुई खेल का अंश देखिए।
एक सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता ने इस जमीन का फर्जी पेपर बनाकर कई प्रॉपर्टी डीलर से करोड़ों रुपया ऐंठ लिया। इसके बाद कुछ रजिस्ट्री भी की गई और रजिस्ट्री हो भी गई। इस बात की खबर पूर्व में जमीन लिए एक फौजी को लगी। फौजी ने इसकी शिकायत सीओ से लेकर कमिश्नर तक की। कई दर्जन लोंगों ने सीओ दफ्तर से डीएम दफ्तर में हंगामा किया। फिर भी उस जमीन पर भू-माफिया मिट्टी गिराकर कब्जे की फिराक में है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि एक चर्चित अपराधी को भी इस जमीन में उसने हिस्सेदार बनाया है।
खुद को कैसे बताते हैं पदाधिकारी कि हम हैं लाचार
इस मामले में पुलिस के ज्यादातर अधिकारी बताते हैं कि जमीन के मामले में पुलिस का काम शांति व्यवस्था बनाने के लिए सिर्फ निरोधात्मक कार्रवाई करना है। जरूरतमंद को तुरंत पुलिस यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि आप सीओ एसडीओ या डीएम के पास जाइए।
कहा जाता है आवेदन दीजिए और फिर शुरू होता खेल
सीओ की ओर से विवादित हुई जमीन में कहा जाता है कि आवेदन दीजिए जांच होगी, पर जांच कम खेल शुरू हो जाता है। जमीन मालिक सीओ, एसडीओ, डीएम, कमिश्नर के यहां दौड़ते-दौड़ते थक-हार जाता है। फिर न्यायालय का चक्कर, लोवर कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगाते-लगाते खुद मर जाता है अगर जिंदा भी रहा फिर भी वह जमीन हासिल नहीं होता। आप इसका जीता जागता उदाहरण ले सकते हैं कि बहादुरपुर थाना क्षेत्र के एक आइएएस की जमीन पर सैकड़ों घर बस गई और जिला प्रशासन मुंह देखती रह गई।
देखें VIDEO LIVE: दरभंगा में भू-माफिया का सिंडिकेट, जमीन आपकी, बेच रहा कोई और
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तरह-तरह के हथकंडे इस्तेमाल करते हैं भू-माफिया
इस वीडियो में आप स्पष्ट देख सकते हैं कि एनएच के बगल में ओर सेंट्रल स्कूल के पीछे जमीन को कब्जा करने के लिए एस्बेस्टस, टीन और लोहे के छड़ का प्रयोग किया गया है, ताकि घेराबंदी या कब्जा जमाने में देरी नहीं हो।
देखें VIDEO LIVE: दरभंगा में भू-माफिया का सिंडिकेट, जमीन आपकी, बेच रहा कोई और
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क्या कहा मब्बी ओपी अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने
मब्बी ओपी अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने पूछने पर कहा कि मुझे सूचना मिली थी कि कुछ जमीन माफिया की ओर से जमीन कब्जा किया जा रहा है। इस सूचना पर जब दल-बल के साथ पहुंचे तो सभी भाग खड़े हुए। उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक कोई लिखित सूचना नहीं मिली है। सूचना मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।



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