

जाले, देशज टाइम्स ब्यूरो। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सिराजुद्दीन ने मंगलवार से लगातार हो रही आद्रा नक्षत्र की बारिश पर किसानों को सलाह दी है।
उन्होंने कहा है कि जिन किसान भाइयों के खेत में नमी कम थी, उन्हें बारिश का इंतजार था। वर्षा होने से जहां उमस भरी गर्मी से निजात मिली है। वहीं, धान की खेती करने वालों किसानो के लिए भी राहत भरी है। किसान अपने खेतो में कदबा कर धान की रोपाई प्रारंभ कर दे, धान की खेती के लिए आद्रा नक्षत्र की यह बारिश वरदान है। इस वर्षा में खासकर वैसे खेत जो ऊंचाई पर स्थित है,जिसमे धान की सीधी बुवाई की गई है उस खेतों में बीज अंकुरण के लिए यह बारिश काफी लाभदायक होगा।
किसानों के व्यर्थ खर्चे जो पटवन के लिए खेतों में लगता है, उनसे छुटकारा मिलेगा। धान की फसल में मुख्यतः तीन अवस्था में पानी की जरूरत होती है, जिसमें पहली अवस्था धान के बीज में अंकुरण होती है, दूसरी अवस्था वानस्पतिक चरण कहलाती है, तथा तीसरी अवस्था प्रजनन चरण कहलाती है, इन तीनों अवस्था में धान की फसल में बारिश काफी गुणकारी होता है अतः आसन्न हुई वर्षा धान की पैदावार में काफी लाभकारी होगाl
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बारिश की वजह से पोखर तालाबों, जलाशयों में पानी जमा होने से किसानों के खेती में सिंचाई में सुविधा होगी,जमा पानी से सिंचाई में खर्च होने वाले पैसे की बचत होगी। धान की सीधी बुवाई में बारिश से खरपतवार की समस्या बढ़ेगी, दूसरी और धान की रोपी हुई खेतों में खरपतवार की समस्या घटेगीl
किसान भाई अगर आपके खेतों में लत्तीदार सब्जिया लगी हों तो पानी की निकासी की व्यवस्था करें। इसी तरह मक्के के खेत में बीज की बुवाई हो चुकी है, तो आप अपने खेतों से वर्षा का पानी के निकासी की व्यवस्था करें। अगर आपके खेतों में पानी रुकता है, तो बीज सड़ने एवं पौधा गलने की समस्या आने वाले दिनों में देखी जा सकती हैl इसलिए कृषक भाइयों से अनुरोध है कि वह मक्के के खेतों से जल निकास करते रहेंl
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