

यह बात कृषि विज्ञान केंद्र जाले के वैज्ञानिक डॉ. सिराजुद्दीन ने देशज टाइम्स से कही है। उन्होंने बताया कि मानक अधिक गर्मी से इन फसलों में नमी की कमी बढ़ती जा रही है। सामान्य से कम बारिश के बाद अब अधिकतम तापमान किसानों के लिए कहर बना है।
गर्मी के लगातार बढ़ने से धान, ज्वार, बाजरा, उरद, मूंग व तिल समेत अन्य फसलों में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस महीने लगातार अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस व उससे अधिक होने के कारण अन्नदाताओं के सामने खरीफ की फसल सूखने का संकट पैदा हो गया है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान धान की फसल को हो रहा है।
धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के दो से तीन दिन बाद तथा 1 सप्ताह के अंदर ब्यूटाक्लोर 3 लीटर प्रति हेक्टेयर या प्रीटिलाक्लोर 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर या पेंदीमैथलीन 3 लीटर प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में छिड़काव करेंl कृषक भाइयों को छिड़काव करते समय खेत में 1 सेंटीमीटर पानी की उपस्थिति रखनी चाहिएl
15 से 20 दिनों उपरांत बिस्पाइरीबैक सोडियम 80 मिली प्रोडक्ट/एकर + पायीराजोसल्फ्यूरोन इथाईल 80 ग्राम प्रोडक्ट/एकड़ दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें तथा फसल के 35 से 40 दिन के बीच एक निराई गुड़ाई अवश्य करें ।
नमी की कमी की वजह से धान में यदि पौधों का रंग पीला पड़ रहा है और पौधे उजले पर रहे हैं तो इसमें लोगों तत्व की कमी हो सकती है। इसके लिए 0.5% फेरस सल्फेट + 0.25% चूने के घोल का छिड़काव आसमान साफ होने पर करें। ऊंची जमीन में धान के बदले सोयाबीन अरहर एवं तिल की खेती कर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।



