नमस्कार, मैं हूं अब्दुल्लाह, हो गया हूं गिरफ्तार! जी हां, इस तरह से चिल्ला-चिल्लाकर बोलने वाला कोई और नहीं एक पत्रकार है। यह में नहीं कह रहा हूं, कई लोग अपनी जुबान से बोलते नजर आ रहें हैं, लेकिन मेरी नजर में यह कथित पत्रकार है। इन्हें पुलिस ने ड्रग्स कन्जूम एक्ट के तहत पकड़कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
दरअसल, एक हत्या के मामले में पुलिस ने अब्दुल्ला नामक युवक को पकड़ा था। उसके पास से गांजा से भरा एक सिगरेट मिला। बेंता ओपी की पुलिस ने हत्या को लेकर ही पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। उसके हिरासत में लेते ही जेडीयू के एक नेता ने पुलिस के आलाधिकारियों का फोन टन-टनाना शुरू कर दिया।
फिर क्या था। पुलिस के कदम आगे-पीछे होने लगे। बेंता पुलिस उसे लहेरियासराय थाने छोड़ गया। वहीं, कुछ देर बाद लहेरियासराय पुलिस उसे बेंता ओपी छोड़ आई। यह हाई वोल्टेज ड्रामा शुक्रवार को चलता रहा। कई मीडिया में खबर आने के बाद पुलिस पेसोपेश में फंस गई। आखिर क्या किया जाए। आखिरकार पुलिस ने गांजा से भरी सिगरेट का हवाला देते हुए लहेरियासराय थाने में एनडीपीएस धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।






दर्ज प्राथमिकी में उल्लेख है कि बेता पुलिस हत्या के एक मामले में छापेमारी और गिरफ्तारीके लिए डीएमसीएच की सड़क से मध्य रात्रि में गुजर रही थी। इसी क्रम में पुलिस की नजर अब्दुल्ला पर पड़ी। वह एक बेग लटकाए हुए था। जांच के क्रम में गांजा से भरा एक सिगरेट मिला इस कारण पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और थाने लायी।
बेंता ओपी अध्यक्ष सरवर आलम ने कहा कि अब्दुल्लाह पर दो गंभीर मामले थे। इसमें चार्जशीट हो चुका है। उन्होंने कहा कि दर्जनों गोली की बरामदगी के एक मामले में लहेरियासराय में एक मामला 281/20दर्ज हुआ था। इसमें सात आरोपी थे। इसमें अब्दुल्ला भी था। मामला सत्य पाया गया था। अब्दुल्ला इस मामले में जेल भी गया था। उन्होंने कहा कि पकड़े गए युवक का नाम अब्दुल्ला उर्फ सलाउद्दीन है जो इमामबारी का रहने वाला है।
इधर, सदर डीएसपी कृष्ण नंदन प्रसाद ने बताया कि उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इधर, विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अब्दुल्ला की कार्यप्रणाली पर पुलिस को शक है। इस कारण उसके घर से लैपटॉप भी बरामद किया गया है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि अगर उक्त लैपटॉप में कोई भी आपत्तिजनक बात निकली तो पुलिस उसे रिमांड पर ले सकती है। हालांकि, इन बातों की पुष्टि कोई भी पुलिस अधिकारी नहीं कर रहे हैं। स्थानीय कई लोंगों का कहना है कि पत्रकार समाजसेवा के लिए पत्रकारिता करता है ना कि अपराधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए।









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