



सच्चाई और इमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन इसपर जो चल पड़े उसका जीवन जरूर सफल हो जाता है। मगर दुर्भाग्य इस देश और बिहार का कि कोई भी ईमानदार बनना ही नहीं चाहता। जिधर देखो उधर बईमानों की फौज है। यह दीगर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे स्वीकार करते कहा है कि राज्य में भ्रष्टाचार है। साथ ही साथ इसके खिलाफ छिड़ी जंग में युवाओं से साथ देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि घूसखोर अधिकारी पकड़े जाने के डर से अब नाते–रिश्तेदार के माध्यम से घूस ले रहे हैं।
सीएम ने नौजवानों से आह्वान किया कि वे भ्रष्टाचारियों के पेट में घुसकर उन्हें पकड़वाएं। पकड़वाने वाले को सरकार एक से पचास हजार तक की राशि पुरस्कार में देगी। सरकार को इससे जितना फायदा होगा उसमें से भी दो फीसदी पकड़वाने वाले को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भ्रष्टचारी चैन की नींद नहीं सो पाएंगे। आय से अधिक संपत्ति वालों पर मुकदमा चलेगा। आगामी विधान सभा सत्र में एक कानून लाया जाएगा जिसके तहत भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अगर कोर्ट में चार्जशीट जमा हो जाएगी तो तत्काल उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। भ्रष्टचारियों के मुकदमों का भी निपटारा भी स्पीडी ट्रायल के जरिए होगा। मगर कहां साहेब, अभी दिल्ली दूर है। हालात यूं है, सीख रहा हूं मैं भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर, कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए। झूठ पर उसके भरोसा कर लिया, धूप इतनी थी कि साया कर लिया।




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