



स्वच्छ भारत अभियान मोदी सरकार ने 2 अक्टूबर, 2014 को महान व्यक्ति महात्मा गांधी की 145 वीं जन्मदिन की सालगिरह पर शुरू किया गया था। इसे राजघाट से लॉन्च किया गया था। मोदी सरकार का मकसद अभियान के माध्यम से दो अक्टूबर 2019 अर्थात् महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती तक भारत को स्वच्छ भारत बनाना था लेकिन बीच में चुनाव आ गया। मोदी सरकार की कई घोषणाओं की तरह यह भी ठंडे बस्ते में चला गया। इस दौरान बड़े-बड़े नामचीन लोगों ने झाड़ू पकड़े। फोटू खिचवाए। अखबारों, चैनलों में छा गए। स्वंय मोदी भी झाड़ू पकड़ने का नाटकिय मंचन कई दफा किया लेकिन हम उसी गंदगी के बीच आज भी जी रहे जहां पहले से मरते आ रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी के आहवान पर मतवालों की टोली निकली, सुंदर चमन बनाने को,चम चम करता स्वच्छ दमकता,अपना वतन बनाने को।
दिल के सच्चे साफ़ हैं हम, ये दुनिया माने सदियों से, चलो साथियो निकलें अब, भारत को स्वच्छ बनाने को। हमने देखे कई करीबी, घोषित दिल के सच्चों को, ज्ञानी ध्यानी महज़ कागज़ी, देखा अच्छे अच्छों को। बड़ी बड़ी बातें तो कर लीं, छोटी बात भुला दी है किस प्रकार की अलमस्ती है, ये कैसी आज़ादी है। हालात शहर का यही है कि हर पग पर गंदगी का साम्राज्य है। कैसे इनको समझाएं हम, क्या रह गया बताने को, चलो साथियों निकलें अब फिर से भारत को स्वच्छ बनाने को। दादा कहिन, मोदी जी ने कमर कसी, उनकी तो तैयारी है, वो तो नामुमिन को मुमकिन कर दे, अब सोचने-समझने की परजा की बारी है। शहर-गली में चर्चा है,स्वच्छ भारत अभियान की, नामुमिन को मुमकिन कर दे झाड़ृ के साथ फोटू खिंचावाने वालों की।


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