
दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। सरकार ही नियम बनाती है। और, उस नियम को सरकार ही तोड़ देती है। हां, कोई आरोप-प्रत्यारोप हो तब तो ठीक है। लेकिन, जब एक भी शिकायत नहीं हो फिर किसी बड़ी कुर्सी का तबादला हो जाए तो सवाल जरूर खड़े हो जाते हैं?
जी हां हम बात कर रहे हैं दरभंगा सदर एसडीपीओ कृष्ण नन्दन कुमार का? टर्म पूरा हुआ नहीं उनकी बदली दरभंगा से हो गई। अभी मात्र उनके पदस्थापन का एक साल बीता था, अगर दो साल पूरे होने के बाद उनकी बदली होती तो कोई सवाल नहीं करता।
हजारों लोग सुर में सुर मिलाकर कह रहे हैं कि 52 डीएसपी की अधिसूचना जारी हुई। उसमें, दरभंगा सदर एसडीपीओ
ही मात्र एक पदाधिकारी थे, जिनका बदली महज एक साल में कर दिया गया। कई लोगों का कहना है कि सरकार की गठबंधन नई है। इसमें एक दल का साफ मानना है कि भूरा बाल साफ करो।
अब सवाल उठता है कि क्या इसी नीति के अंतर्गत सदर एसडीपीओ का स्थानांतरण किया गया? अगर नहीं तो इस पोस्टिंग के लिए क्या बड़े पैसों का लेन देन हुआ?
अगर बड़े पैसों का लेन देन हुआ तो गृह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है। तो क्या यह लेन देन मुख्यमंत्री के चमचों की ओर से बड़ा लेनदेन कर एसडीपीओ की बदली की गई? लोग कई तरह के सवाल खड़ा कर रहे हैं।
यह बात भी सही है कि इनकी कोई शिकायत नहीं थी। अच्छे काम कर रहें थे।यहां के लोंगों के सिवाय सारे पुलिस कर्मी खुश थे। फिर ऐसी क्या बात हुई कि इनका स्थानांतरण सरकार को करना पड़ा। सरकार ने ऐसा कर अपने नियम को ही तोड़ा है।
दरभंगा जिला से विरमित हुये एसडीपीओ कृष्ण नन्दन प्रसाद ने अपना कार्यभार नये पदस्थापित एसडीपीओ अमित कुमार को अपने कार्यालय कक्ष में सौंप दिया। इस दौरान बिरोल एसडीपीओ मनीष चंद्र बेनीपुर के एसडीपीओ डॉ॰ सुमित कुमार मौजूद थे।
एसडीपीओ कृष्ण नन्दन कुमार के कार्यभार देने के बाद उनके कई सहकर्मियों ने फूल के माला को पहनाकर स्वागत के साथ विदाई दिया।
एसडीपीओ कुमार के स्थानांतरण के बाद उनके कार्यालय के कर्मी काफी दु:खी थे। एस आई सुनीता कुमारी तो कई बात कहते कहते रों पड़ी। उसके आंख का पानी सुख नहीं रहा था। मो जुबेर ,कुमारी शालनी के अतिरिक्त सभी के सभी इस स्थानांतरण से दुखी थे।
एक सवाल सबके दिमाग में था कि टर्म पूरा नहीं हुआ फिर इनकी बदली यहां से कैसे हो गई। क्यों हुई। किसी साजिश का शिकार तो नहीं हुये। एसडीपीओ की कार्यशैली ऐसी थी कि कोई भी बड़ी घटना हो तो सामने वहीं खड़े हो जाते थे। कोई भी बड़ा से बड़ा समस्या हो ऐसे गुजर जाते थे जैसे कोई समस्या ही नहीं हो। हर समस्या को जब दूर कर पहुंचते थे। फिर एसएसपी को पता चलता था और वह निश्चिंत हो जाते थे।








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