
दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। दरभंगा जिला के विभिन्न जगहों से हो रही गाड़ी चोरी के मामले में पुलिस की ओर से ससमय प्राथमिकी दर्ज नहीं करना वाहन मालिकों के लिये परेशानियों का सबब बन रहा है।
महज चंद पैसों के लिये एफआइआर दर्ज नहीं करना मानवता को शर्मसार करता है। यही नहीं ऐसे गंभीर मामलों में एसएसपी या आई जी से कितनी भी शिकायत कर दे कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे ही पदाधिकारी जब आम लोंगों को न्याय नहीं देती है तो सरकार भी बदनाम होती है और आम लोग इसे जंगल राज कहने से नहीं हिचकते।
सुनिए देशज टाइम्स पर ऑडियो: बिरौल थाने के डाटा ऑपरेटर और विजय की बातचीत का अंश [su_audio url=”http://deshajtimes.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Audio-2022-09-24-at-3.54.18-PM.aac”]
इन दिनों शराब के व्यापार करने वाले लोग अक्सर गाड़ी चोरी चोरी कर उसपर शराब ढोते है और गाड़ी के पकड़े जाने के बाद पुलिस का शिकार वाहन मालिक बन जाते है। चर्चा में कई बार यह बात आई है कि शराब माफियाओं के कई ग्रुप ऐसे है जो वाहनों को चोरी करने के बाद उसपर शराब ढोता है और यही गाड़ी पुलिस की ओर से पकड़ी जाती है तो वाहन मालिक आरोपी बन जाता है। इससे वाहन मालिक समेत उसका पूरा परिवार काफी परेशान हो जाता है।
ऐसा ही एक मामला बिरौल थाना क्षेत्र के बंदा गांव का है। जहां, 19 जून 22 की देर रात गौरी शंकर राय के पुत्र विजय कुमार राय के पीकअप वैन बीआर07एच -5523 की चोरी चोरों ने कर ली। 20 जून 22 को इसकी लिखित शिकायत विजय ने बिरौल थाना से की।
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बिरौल थाना की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने के लिये पैसों की मांग की जाने लगी। पैसा नहीं देने के कारण विजय की प्राथमिकी थाने में दर्ज नहीं हुई। एक दिन बाद फिर विजय बिरौल थाना पहुंचा। थाना अध्यक्ष थाने पर नहीं थे। विजय का कहना है कि बिरौल के मुंशी ने चार पांच हजार रुपये प्राथमिकी दर्ज करने के नाम पर मांगा। लेकिन, उसने देने से मना कर दिया।
विजय ने कहा कि दो सौ रुपये थाना मुंशी को देकर चले आये। फिर भी उसके गाड़ी चोरी की प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उसके बाद विजय की बात थाना के डाटा ऑपरेटर से हुई। डाटा ऑपरेटर भी विजय को एफआईआर दर्ज करने के लिये विजय को पैसा देने को कहा। लेकिन, विजय ने फिर भी पैसा नहीं दिया।
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इस कारण गाड़ी चोरी की प्राथमिकी बिरौल थाने में दर्ज नहीं हुई। इसका एक ऑडियो रेकार्डिंग है जो प्रमाणित करता है कि पैसों की खातिर ही बिरौल थाना की पुलिस विजय के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया।
यह बात उस वक्त नजर में आई जब विजय के गाड़ी को समस्तीपुर जिला अंतर्गत खोदाबंद थाने की पुलिस ने पकड़ा। उस गाड़ी से 870 लीटर शराब जप्त हुये। प्राथमिकी दर्ज हुई जिसमें वाहन मालिक भी अभियुक्त बनाया गया। कुछ दिनों पहले जब विजय को इस मामले में न्यायालय से नोटिस आया तो वह हक्का बक्का हो गया। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वह करें भी तो क्या करें।
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अब सवाल उठता है कि ऐसी परिस्थिति में दोषी कौन? बिरौल पुलिस या वाहन मालिक। जबकि गाड़ी चोरी की सीसीटीवी फुटेज भी है। अगर बिरौल थाने की पुलिस एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान कर लेती तो शायद विजय पर दु:ख का पहाड़ नहीं टूटता। विजय ने एसएसपी और आईजी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।








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