



शहर का भी दस्तूर वही जंगल वाला, खोजने वाले ही अक्सर खो जाते हैं। हमारे शहर का हाल यह है, सच्चाई और इमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन यही रिश्तों में भरोसा पैदा करता है। मगर यहां तो हर कदम पर प्रशासन के चौचलेबाजी हैं। नियम बनते हैं
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मगर कागजों में दफन हो जाते हैं। सुबह होती है शाम होती है नियम कायदे हर जगह टूटते दिखते हैं। हालात यही, तुम भी इस शहर में बन जाओगे पत्थर जैसे, हंसने वाला यहां कोई है न रोने वाला।
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