
दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। नगर थाना अध्यक्ष को निलंबित किये जाने के बाद शहर के तमाम लोगों ने सांसें जरूर ली हैं लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली है। जब तक चोर पकड़े नहीं जाते, शहर में एक भय का माहौल है। हालांकि एसएसपी को थानाध्यक्ष मदन प्रसाद की अकर्मण्यता की परख देर से हुई लेकिन उन्होंने फैसला ससमय ले लिया और थानाध्यक्ष समेत तीन और भी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया।
इसमें सअनि उमेश सिंह ,टाइगर मोबाइल दीपक कुमार, आशुतोष कुमार का नाम शामिल है। इन सभी के विरुद्ध क्राइम कंट्रोल के मामले में लापरवाही, उदासीनता और कर्तव्यहीनता के आरोप में एसएसपी अवकाश कुमार ने निलंबित किया है।
उन्होंने कहा है कि जब थानाध्यक्ष पद पर मदन प्रसाद लहेरियासराय थाना में थे तो इनकी उदासीनता दिखाई पड़ी। कांड दर कांड कारित होता रहा जबकि नगर थाना में थानेदार बनने के बाद भी कार्य में लापरवाही, उदासीनता दिखाई नजर आती रही। इस उदासीनता को लेकर इन चारों को निलंबित किया गया है।
दरअसल श्री प्रसाद जब से लहेरियासराय थानाध्यक्ष बने चोरी की घटना में अप्रत्याशित वृद्धि हो गई। यही नहीं चोरो के चोरी करने का तरीका भी कुछ अलग सा था। इससे पहले इस जिला में चोरी जरूर होती थी पर खिड़की को उखाड़कर घर में प्रवेश कर चोरी कर भाग जाना एक नई तकनीक का प्रयोग था। चोरो की यह तरकीब कई घरों में हुई चोरी के मामले में दिखाई पड़ा। श्री प्रसाद थानाध्यक्ष रहते किसी भी मामले का उदभेदन नहीं कर पाएं।
श्री प्रसाद जब नगर थानाध्यक्ष बने तो इसी तरह इस थाना क्षेत्र में चोरी होने लगी ऐसा लग रहा था कि थानाध्यक्ष आगे आगे चल रहें थे चोर इनके पीछे पीछे था।
यहां भी किसी मामले के उदभेदन में ये सक्षम नहीं दिखाई दे रहें थे। इनकी यह उदासीनता इनसे भी आगे चल रही थी। देशज़ टाईम्स इस बात को बार बार लिख रहा था ताकि वरीय पुलिस अधिकारी इस मामले में समय रहते संज्ञान लें। दरभंगा महाराजाधिराज़ के भतीजे रत्नेश्वर सिंह के यहां हुई चोरी ने लोगों को सकते में डाल दिया।
और, पुनः देशज टाइम्स ने प्रमुखता से लिखते हुये थानाध्यक्ष के कमियों को गिनाया। आखिरकार एसएसपी श्री कुमार ने नगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया। यही नहीं रात्रि गश्ती में उदासीनता बरतने के आरोप में अन्य तीन पुलिस कर्मियों को निलंबित करते हुये थाना अध्यक्ष नगर के पद पर हरि नारायण सिंह को आसीन कर दिया।
एसएसपी अवकाश कुमार के इस कारवाई के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा हें कि जिले में वरीय पुलिस पदाधिकारी भी हें जिनकी नजर आम जनता के लिये बेहतर पुलिसिंग पर हें।नहीं तो कई ऐसे थानेदार जिले में हें जो अपनी मनमर्जी करने के लिये चर्चित हैं। और, उनपर किसी की नजर नहीं पड़ती।
जैसे पुलिस का राज नहीं हो। खैर इतना तो जगजाहिर है कि पुलिस विभाग अनुशासनिक विभाग है। और इन्हें अगर अपने वरिष्ठ अधिकारियों का भय नहीं हो तो फिर पुलिसिया व्यवस्था कंट्रोल से बाहर हो जाती है।
और ऐसा तब देखा गया है जब थाने की खरीद फरोख्त हो। अगर ऐसा नहीं है तो इन थानेदार से आम लोगों को न्याय जरूर मिलता है। फिर थानेदार की वाहवाही तो होती ही है। वरीय पुलिस पदाधिकारियों का सम्मान बढ़ जाता है। और, इस कारण अपराध भी घट जाता है।


