

बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। छठ पर्व को लेकर केंद्रीय रेलवे विभाग की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था किया है। लेकिन 7 अक्टूबर 2022 से सकरी-हरनगर भाया बिरौल चलने वाली बंद ट्रेन को चालू कराने की दिशा में विभाग से लेकर जनप्रतिनिधि मौन क्यों बैठे हुए हैं।
क्या बेनीपुर क्षेत्र में हॉल्ट निर्माण की मांग को लेकर जो आंदोलन जारी उसे समाप्त करने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है ? क्या ग्रामीण क्षेत्र के रेलवे यात्रियों खासकर दुसरे प्रदेश से काम कर घर लौट रहे मजदूरों को ट्रेन की सुविधा दिलाना उनकी दायित्व नहीं बनता।इसको लेकर बेनीपुर, बिरौल से लेकर कुशेश्वरस्थान के हरनगर तक प्रति दिन लोग आलोचना कर रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का माने तो विभाग के साथ मजबूरी हो सकती है लेकिन स्थानीय स्तर पर इस समस्या को जनप्रतिनिधि ही दूर तो कर ही सकते हैं जो नहीं हो पा रहा है।
आखिर क्यों ? क्या इससे पिछे कोई राजनीति रोटी तो नहीं सेकी जा रही है। अगर नहीं तो सर्व प्रथम इस आंदोलन को समाप्त कर रेलवे यात्रियों को ट्रेन सुविधा बहाल कराने की दिशा में पहल होनी चाहिए। दुसरी ओर ट्रेनों के परिचालन बंद हो जाने से बिरौल और हरनगर स्टेशन वीरान बन चुका है।

स्थानीय युवाओं में आमिर, मो.साकिव इकबाल, कन्हैया कुमार,नासिफ, मुकेश झा,एमडी फईम अख्तर,केशव राज,मनोज कुमार सहित कई लोगों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न समस्या को जनप्रतिनिधी ही दूर कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
आक्रोशित लहजे में इन लोगों ने कहा कि जब मामले को समाप्त कराने में विभाग और जनप्रतिनिधि सक्षम नहीं है तो सकड़ी-हसनपुर रेलवे प्रोजेक्ट को सदा के लिए बंद कर देना चाहिए, अन्यथा विभागीय मंत्री से लेकर क्षेत्रीय नेताओं का पुतला फूंके जाने की चेतावनी दिया है।
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