



एहसास तो तब होता है, जब घर में एक बूंद पानी नहीं होता, जोर जोर से है बच्चा रोता, बिन पानी ही, है वो पूरी रात सोता, स्मरण करो उस क्षण को, मांगने पर जब पानी ही कोई नहीं देता, काश ऐसा होता कि घर में पानी होता , न तरसते तुम एक बूँद को ||ऐसी प्यास और ऐसा सब्र दरिया पानी पानी है क़िस्से से तिरे मेरी कहानी से ज़ियादा, पानी में है क्या और भी पानी से ज़ियादा, पानी ने जिसे धूप की मिट्टी से बनाया वो दाएरा-ए-रब्त बिगड़ने के लिए था पानी की एक बूंद, जिन्दा रखती है, हम सबकी उम्मीद को…निकलती है आसमान से, जब बादलों को चीरते हुए, हवाओं से जूझते, परेशानियों को गले लगाते, हंसते, मुस्कराते, गिरती है जब धरती पर छपाक से, खिलखिला देती है चेहरा, पूरा करती हम सबकी उम्मीद को|
पानी की एक बूंद, जिन्दा रखती है, हम सबकी उम्मीद को… बूंद तो एक बूंद ही है, एक बूंद क्या मायने रखती है, हम तो धनवान हैं, ऐसी हजारों बूंदें खरीद लेंगे,लेकिन पूछो उस किसान से, यही बूंद जब नहीं होती उसके खेतों में, कांप उठता है ह्रदय उसका, झकझोर देती है उसकी उम्मीद को, पानी की एक बूंद, जिन्दा रखती है, हम सबकी उम्मीद को… नाती-पोते खड़े रहेंगे जल, राशन की कतारों में, पानी पर से बिछेंगी लाशें, लाखों और हजारों में। रिश्ते-नाते पीछे होंगे, जल की होगी मारामारी, रुपयों में भी जल न मिलेगा, जल की होगी पहरेदारी। हनन करेंगे शक्तिशाली, नदियों के अधिकारों का, सारे जल पर कब्जा होगा, बाहुबली मक्कारों का।



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