
दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। आप थानेदार हैं, आपकी मोटरसाइकिल कहीं से चोरी हो जाय, और आपका एफआईआर नहीं हो तो आपको कैसा लगेगा। अगर उसी मोटरसाइकिल से अपराधी शराब या अन्य मादक पदार्थ ढोने लगे और वह मोटरसाइकिल पुलिस के हत्थे चढ़ जाय तो जाहिर सी बात है कि प्राथमिकी में आप मुख्य आरोपी हो जाएंगे।
इसके बाद आपके दिल और दिमाग पर क्या गुजरेगी, आप सोच सकते हैं। आपकी हालत उसके बाद बदतर हो जाएगी। आप एफआईआर की संख्या बढ़ने या फिर वरीय पदाधिकारियों के निकट अपनी बेहतर प्रदर्शन दिखाने के चक्कर में एक बेबस और लाचार व्यक्ति का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। आप भी एक इंसान हैं और इंसानियत बरकरार रखिये। ऐसी कार्यशैली आपकी है और इससे बदनामी आपके वरीय पुलिस अधिकारियों को झेलनी पड़ती है।
बहादुरपुर थाने का एक ऐसा ही मामला है। मब्बी ओपी के बांध बस्ती निवासी वीरेंद्र कुमार सहनी अपनी मोटरसाइकिल (BR07A 1043) चोरी का मामला दर्ज कराने बहादुरपुर थाना पांच अक्टूबर को पहुंचे थे। वहां थाने पर उनसे आवेदन लें लिया गया और करीब एक माह बीतने को है उनकी मोटरसाइकिल चोरी की एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।
श्री सहनी कई बार थाना का चक्कर लगाये फिर उनका आवेदन यह कहते हुए रख लिया गया कि आपके मोटरसाइकिल चोरी का एफआईआर दर्ज कर देंगे। करीब 15 दिनों तक एफआईआर नहीं हुआ तो वीरेंद्र सहनी ने इस बाबत एसडीपीओ सदर अमित कुमार से शिकायत की।
एसडीपीओ श्री कुमार ने बहादुरपुर थाना अध्यक्ष को इस बाबत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद बहादुरपुर थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। वीरेंद्र सहनी अपनी पत्नी के साथ गांव से किसी काम बस एकमी घाट आये थे। सूर्या डेंटल क्लीनिक के सामने सड़क पर गाड़ी खड़ी कर वह अंदर गये। जब लौटकर आये तो देखा उनकी मोटरसाइकिल गायब थी।
काफी खोजबीन के बाद मोटरसाइकिल उन्हें नहीं मिला तो एफआईआर दर्ज कराने थाना गये थे। वीरेंद्र ने कहा कि पुलिस के इस कार्यशैली से हतप्रभ हैं। उन्होंने कहा कि थानाध्यक्ष जब डीएसपी साहब का बात नहीं माने तो समझ में आया कि अब पुलिसिया कार्यशैली में कितनी गिरावट हुई है।
उन्होंने रोते हुये कहा कि आखिर पुलिसिया व्यवस्था किसके लिये हें। बहादुरपुर थाना के और भी पूर्व में मामले आये थे जिसमें उनकी ओर से चोरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।



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