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फ़रवरी, 25, 2026
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दरभंगा के बिरौल में चल रहा ड्रग्स इंस्पेक्टर का खेल…छापेमारी के पीछे मंशा क्या है…? पढ़िए धारावाहिक में छपने वाली इस खबर की पहली किस्त

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बिरौल अनुमंडल के बिरौल और कुशेश्वरस्थान समेत बेनीपुर में इन दिनों ड्रग्स की दुकानें ड्रग्स इंस्पेक्टर के निशाने पर है। ड्रग्स इंस्पेक्टर की मनमानी चरम पर है। दवा दुकानों में छापेमारी कर रहे ड्रग्स इंस्पेक्टर अपनी मर्जी दवा दुकानदारों पर थोपते हैं। उगाही की अति है। देशज टाइम्स के पास जो सबूत और ऑडियो है। वह हम आपतक पहुंचाएंगें। क्योंकि, दवा दुकानदार इनकी कारगुजारी से त्रस्त हैं। दवा दुकानदारों में भारी आक्रोश है।

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हम बताएंगें कैसे दवा दुकानों के आगे रूकती है ड्रग्स इंस्पेक्टर की गाड़ी, कैसे उतरते हैं एक कर्मी कहते हैं…साहेब बुला रहे हैं….हमें दवा की इक-इक रूख पता है ड्रग्स इंस्पेक्टर साहेब…थोड़ा संभलकर

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वहीं, कई सवाल हैं जिसे देशज टाइम्स अपने पाठकों के साथ प्रशासन खासकर स्वास्थ्य महकमा का ध्यान खीचेंगा। देशज टाइम्स लगातार एपिसोड में दवा दुकानों की पीड़ा और उनपर स्वास्थ्य व्यवस्था की लचर होती डाल का पड़ता दबाव भी हम खंगालेंगे। हम लिखेंगे कैसे दवा दुकानदारों से अवैध उगाही की अति हो रही है।

 

आखिर ये उगाही क्यों और किस लिए। सिस्टम में जब हर जगह छेद हो तो उसका कोपभाजन दवा दुकानदार ही क्यों बने। आखिर दवा दुकानदारों की गलती क्या है? उन्हें गलती करने को मजबूर कौन कर रहा है? उनपर दबाव कौन बना रहा। उनसे उगाही कौन कर रहा? चंद दलालों को हिस्से में लेकर अपना सिक्का उछालने वाले ऐसे अफसरों की पूरी पोल हम खोलेंगे।

 

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साथ ही पूरे सबूत के साथ हम सरकार समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को वस्तु स्थिति से अवगत कराएंगें। आखिर, ड्रग्स इंस्पेक्टर चाहते क्या हैं? उनकी मंशा क्या है? वह दवा दुकानदारों को परेशान क्यों कर रहे? दवा दुकानदारों से भी बात होगी? साथ ही नियम भी हम पढ़ाएंगें। आखिर दवा दुकानदारों की गलती क्या है। दवा दुकानों को सरकारी सिस्टम से चलने में कौन बाधक बन रहा। तमाम चीजों को समेटे हम धारावाहिक में खबरों को परोसेंगे। सरकार को जगाएंगें, वरिष्ठ प्रशासन के ध्यानार्थ सारी चीजों को लाएंगे।

तमाम चीजों को समेटे उत्तम सेन गुप्ता की यह पहली रिपोर्ट जो अभी धारावाहिक में चलेंगी। हम पोल खोलेंगे, दवा दुकानदारों की पीड़ा, उनकी मजबूरी उजागर करेंगे…पूरा काला चिट्‌ठा खोलेंगे। तब तक पढ़िए यह पहली रिपोर्ट….आगे लगातार इसपर कवरेज होगा, जो हम धारावाहिक में आप समस्त लाखों पाठकों तक पहुंचाएंगें…पढ़िए पहली किस्त

 

बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। बिरौल अनुमंडल के दवा दुकानदार इन दिनों स्वास्थ्य विभाग के औषधि नियंत्रक से त्रस्त हैं। जिला में पदस्थापित औषधि विभाग के एक ड्रग्स इंस्पेक्टर इन दिनों अपनी उगाही और दुकानदारों को तबाह करने के लिए चर्चित हो गए हैं।

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अपने हिटलरशाही कारनामों से बिरौल, कुशेश्वरस्थान और बेनीपुर में आजकल इनकी काफी चर्चा है। दवा दुकानों को निशाना बनाना इनकी आदत है। कभी बेनीपुर कभी बिरौल कभी कुशेश्वरस्थान में यह धमकते हैं और बकौल दवा दुकानदार उनपर दबाव डालते हैं।

इसके अलावे ग्रामीण चिकित्सक भी इनके रडार पर होते हैं। ग्रामीण चिकित्सकों के क्रियाकलापों पर भी इनकी पैनी नजर रहती है। जानकारों का कहना है कि स्थानीय बाजार में इनका एक गुप्त स्थान हैं, जहां बैठकर दवा दुकानदारों के दुकानों की जांच काफी गंभीरता से करते हैं।

इस दौरान इनके खास एक व्यक्ति दवा दुकानदारों के अलावे ग्रामीण चिकित्सकों को उक्त गुप्त स्थान पर आने और पदाधिकारी से मिलने का संदेश देते हैं। जहां कई तरह के नियमों का पाठ पढ़ा कर उनके मानसिकता को भरमाने का प्रयास किया जाता है।

 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि ड्रग्स इंस्पेक्टर का कार्य क्षेत्र दवा दुकानों तक ही सीमित रहती है। जहां तक ग्रामीण चिकित्सक का सवाल है उस पर नियंत्रण रखना सिविल सर्जन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

परंतु शंभुनाथ ठाकुर ऐसे ड्रग्स इंस्पेक्टर हैं जो उस नियम को लांघ कर अपनी डिक्टेटरशिप पर उतारु हैं। अब सवाल उठता है कि पिछले दिनों सुपौल बाजार में एक सप्ताह के अंदर दो दिन डीआई शंभुनाथ का आना कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर इशारा कर रही है। इस पर देशज टाइम्स की सीसीटीवी कैमरा इनके हर गतिविधियों पर पैनी नजर रखेगी। क्योंकि, जिस तरीके उनके आने और दवा दुकानदारों को प्रताड़ित करने का यह सिलसिला चल पड़ा है। दवा दुकानदारों में भीषण आक्रोश है।

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डीआई श्री ठाकुर के अनुसार जनता की शिकायत पर वह पिछले दिनों छह दवा दुकानों का जांच करने बिरौल गए थे। लेकिन सवाल यह उठता है कि छह के स्थान पर एक ही दवा दुकान भगवती ड्रग्स एजेंसी को ही उन्होंने टार्गेट क्यों बनाया? शेष पांच दुकान डीआई के नजर में क्या सरकारी नियम के अनुरूप संचालित हो रहा था?

इनकी ओर से किए गए कार्रवाई को समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के लिए मीडिया पर दबाव बनाने के पीछे इनकी मंशा क्या थी? ऐसे कई महत्वपूर्ण सवाल को लेकर क्षेत्र की जनता आक्रोश में है। अब सवाल पूछेगा देशज टाइम्स? अब व्यवस्था की परत खोलेगा देशज टाइम्स? देशज टाइम्स असंभव से आगे…पढ़िए जाग जाइए…।

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