



चुनावी माहौल गर्म है, बयानबाजियों का दौर भी तेज हो चला है, नेता रैली जोर पकड़ चुकी है और जनता की अदालत में नेताओं की अग्निपरीक्षा का वक्त आ गया है राजनीति ने आका-नेताओं को क्या-क्या सिखा दिया बड़े-बड़े से नेता को भी जनता के क़दमों पर झुका दिया राजनीति में साम-दाम-दंड-भेद सब अपनाया जाता है जरूरत पड़े तो दुश्मन को भी दोस्त बनाया जाता है।
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देश की जनता भूखी है यह आजादी झूठी है। भ्रष्ट और निर्मोही को,अंदर से मारो चोट। जो गांवों को चमन बनाए, गलियों को महकाए। कोई अशिक्षित रह न पाए। सब बच्चों को पढ़वाए। ऐसे किसी विशेष व्यक्ति को, दे देना यारों वोट। सच से कभी नहीं डिगा हो,न कोई किया हो घपला।हो लोकप्रिय जन-जन का हितैषी,दूर किया हो झगड़ा।ऐसे वीर व्यक्ति को यारा,सारे देना वोट।भ्रष्ट और निर्मोही को, अंदर से मारो चोट। 
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