
मधुबनी, देशज टाइम्स। झंझारपुर कोर्ट में एडीजे से मारपीट प्रकरण एक साल बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। एडीजे से मारपीट के आरोपी घोघरडीहा के पूर्व थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण के बयान पर 7माह बाद झंझारपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस प्राथमिकी में एडीजे प्रथम अविनाश कुमार, नगर पंचायत के जेई दीपक राज एवं कोर्ट कर्मी अवकाश मिश्रा को नामजद किया गया है। जिसमें पटना हाईकोर्ट ने एडीजे पर की गई एफआईआर को बंद कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर यह मामला कोर्ट व पुलिस प्रशासन के गलियारों में चर्चा में आ गया है।
मामले की जानकारी देते हुए आवेदक के अधिवक्ता अभिषेक रंजन ने बताया कि 18 नवंबर 2021 को झंझारपुर कोर्ट परिसर स्थित एडीजे के कार्यालय कक्ष में मारपीट की घटना सामने आई थी। घटना के बाद आवेदक पु०अ०नी० गोपाल कृष्ण (तत्कालीन थानाध्यक्ष घोघडिहा) के बयान पर प्राथमिकी संख्या 124/22 दर्ज हुई थी।
प्राथमिकी में आरोपी पर 341, 342, 323, 353, 355, 307, 504, 506 एवं 34 भादवी धारा लगाई गई थी। इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सीडबल्यूजेसी न. 19402/21 में एडीजे की ओर से की गई एफआईआर की जांच का जिम्मा सीआइडी को सौंपा था।
जिसमें गोपाल कृष्ण द्वारा दर्ज किए गए एफआईआर 124/22 को “मिस्टेक ऑफ लॉ” के कारण बंद करने का आदेश 31अगस्त 22 को पारित किया था। जिसके विरुद्ध आवेदक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एसएलपी दायर किया गया था।
इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एमआर साह और न्यायमूर्ति एस० रविन्द्र भट्ट के बेंच के समक्ष सीलबंद लिफाफे में 8 दिसंबर 22 को प्राप्त रिपोर्ट को देखकर यह आदेश पारित किया गया की पूर्व में दर्ज एफआईआर को बहाल कर निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए।
जानकारी के अनुसार, जांच के क्रम में सीआइडी की टीम कई बार झंझारपुर के चक्कर काट चुकी है. झंझारपुर थाना में पूर्व थानाध्यक्ष के बयान पर दर्ज प्राथमिकी का अनुसंधान सीआइडी के एसपी कर रहे थे। झंझारपुर थाना में 20 जून की तारीख में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पूर्व थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण कोर्ट कर्मी अवकाश मिश्रा से मोबाइल पर मिली सूचना के आलोक में एडीजे प्रथम अविनाश कुमार से मिलने पहुंचे थे।
जब वे इजाजत लेकर एडीजे के कक्ष में गए तो वहां नगर पंचायत के जेई घोघरडीहा निवासी दीपक राज एवं अन्य पहले से मौजूद थे। एडीजे ने अंदर आते ही उनके साथ बदतमीजी की और गाली-गलौच किया, मना करने पर जूता निकालकर मारने लगे।
आत्मरक्षार्थ उन्होंने जूता पकड़ कर नीचे रख दिया जिसके बाद दीपक राज, अवकाश मिश्रा एवं अन्य कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। पूर्व थानाध्यक्ष के बयान के अनुसार उन्हें बचाने एसआइ अभिमन्यु कुमार शर्मा बाहर से आए तो उनके साथ भी मारपीट कर लहुलुहान कर दिया गया।
उन्होंने शौचालय में अपने आप को बंद कर जान बचाई। बयान में एडीजे पर एसआइ शर्मा का रिवाल्वर छीन कर टेबल के अंदर रखने का आरोप भी लगाया गया है. 8महीने जेल में रहने के बाद हाई कोर्ट से 29 जून 2022 को बेल मिला था।
एडीजे कक्ष में मारपीट की घटना 18 नवंबर 2021 को घटी थी. उस समय यह बात सामने आई थी कि दोनों पुलिस पदाधिकारियों ने एडीजे के कक्ष में घुसकर उनके साथ मारपीट की और एडीजे पर पिस्तौल तान दी। मारपीट की भनक लगते ही कोर्ट कर्मी व कई अधिवक्ता वहां पहुंचे और बीच बचाव कर एडीजे को पुलिस अधिकारियों के कब्जे से मुक्त कराया।
इस दौरान दोनों पुलिस पदाधिकारियों की पिटाई भी हुई, जिसमें वे जख्मी हुए थे. घटना के बाद दोनों पुलिस पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर इलाज के लिए डीएमसीएच भेजा गया था। वहीं, एडीजे के बयान पर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अस्पताल से निकलने के बाद दोनों आरोपित पुलिस पदाधिकारियों को जेल भेज दिया गया था। इस दौरान 19 नवंबर 2021 को ही आरोपित पुलिस पदाधिकारी गोपाल कृष्ण का बयान लिया गया था जिस पर सात माह बाद 20 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।







