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बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। वर्षों बाद व्यवहार न्यायालय बिरौल को अपना भवन नसीब होने वाला है। चूंकि भवन निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
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आने वाले वर्ष 2023 में न्यायालय से संबंधित कार्य इस भवन में विधिवत शुरू हो जाएगा। यहां पदस्थापित न्यायाधीश एसीजेएम प्रथम पंकज चन्द्र वर्मा, एसडीजेएम रंजन देव, मुंशीफ वृजनाथ, जेएमएफसी दिनेश मणि त्रिपाठी एवं कुमार शशि अपने अपने न्यायालय में बिरौल अनुमंडल क्षेत्र के सभी चार थाना और दो ओपी क्षेत्र से आये न्यायिक कार्यों का निष्पादन करते हैं।
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फिलहाल न्यायालय कार्यालय प्रखंड किसान ई भवन मे संचालित हो रहा है। अधिवक्ताओं में चर्चा है कि बिरौल व्यवहार न्यायालय का मॉडल भवन निर्माण से आने वाले समय मे यहां जिला एवं सत्र न्यायालय एवं उच्च न्यायालय पटना का एक खंड पीठ की स्थापना किया जा सकता है। जिस उच्च न्यायालय के खंड पीठ से दरभंगा, मधुबनी, 
सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज,समस्तीपुर,खगड़िया,बेगूसराय सहित अन्य जिले के लोगों को न्यायिक कार्य का लाभ मिलेगा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चे लाल झा, सचिव राजकपूर पांडेय, पूर्व अध्यक्ष गोविंद माधव, वरीय अधिवक्ता स्वतंत्र मिश्र,रामविलास यादव, रामचन्द्र यादव, कैलाश कुमार,संतोष सिंह सहित कई अधिवक्ताओं ने उक्त आशय का समर्थन करते हुए कहा कि इसके लिए आगे की रणनीति तय की जा रही है।
उक्त खंड पीठ की स्थापना के संबंध में पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता नटवर कुमार मिश्रा ने पूछे जाने पर बताया कि उच्च न्यायालय की स्थापना संविधान की अनुसूची (7) अनुछेद 246 मे वर्णित संघ सूची के क्रमांक 71 से केंद्र सरकार की ओर से की जाती है। वहीं किसी राज्य मे उच्च न्यायालय के अतिरिक्त खंड पीठ की स्थापना के लिए राज्य के उच्च न्यायालय की ओर से केंद्र सरकार के विधि विभाग को स्थापना संबंधित अनुशंसा पत्र भेजा जाता है।
उन्होंने बताया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अधिवक्तागण एवं विभिन्न संगठनों को उक्त खंड पीठ की स्थापना हेतु एक लिखित मांग पत्र विधिवत रूप से रजिस्ट्रार जनरल एवं मुख्य न्यायाधीश पटना उच्च न्यायालय को समर्पित करना होगा। और चरणबद्ध तरीके से इसे जारी रखने की आवश्यकता है।
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