back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 14, 2026
spot_img

दरभंगा के कुशेश्वरस्थान में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बनाने में चल रहा अवैध वाला खेल… High Court की हुक्म बेअसर

spot_img
- Advertisement - Advertisement

प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर रहे है दरभंगा के सिविल सर्जन। सारे नियम को ताख पर रखकर बना रहे हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी। पढ़िए Prashant Kumar की यह EXCLUSIV REPORT

- Advertisement -

आइए जानते हैं कैसे होता है मोटी रकम लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की पोस्टिंग। सूत्र बताते हैं कि एक छोटा सा उदाहरण लें तो कुशेश्वरस्थान पश्चिमी प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ऐसे डॉक्टर को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बनाया गया है जो ना तो विभागीय परीक्षा पास है, ना तो कोषागार प्रशिक्षण प्राप्त है और ना ही राजस्व परिषद पटना से अनुमोदन प्राप्त है।

- Advertisement -

इसके बावजूद, अवैध तरीके से प्रभारी सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बनाये गए जबकि इस पीएचसी में ऐसे भी सीनियर डॉक्टर मौजूद है जिसके पास उक्त सारे अनुभव है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  दरभंगा में Bihar Board Matric Exam की तैयारी पूरी, 63 केंद्रों पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने बनाया ये 'चक्रव्यूह'!

जानकारी के अनुसार, उच्च न्यायालय पटना के आदेश CWJC 10020/2020 के आदेश के अनुसार वही डॉक्टर प्रभारी सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बन सकते हैं जो विभागीय परीक्षा पास है, कोषागार प्रशिक्षण प्राप्त है और राजस्व परिषद पटना से अनुमोदन प्राप्त है।

इसके बाद बिहार सरकार के तत्कालीन उप सचिव शैलेश कुमार के ज्ञापांक 1091(3) दिनांक 21/12/21 में बिहार के सभी असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को आदेश दिया कि वरीय चिकित्सा पदाधिकारी  अपने अधीनस्थ रेफरल अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रभारी/निकासी व्ययन पदाधिकारी बनाना सुनिश्चित करें।
लेकिन जानकार बताते है कि दरभंगा के सिविल सर्जन पीएचसी से मोटी रकम लेकर माननीय न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ा कर अपना आदेश चला रहे है और ऐसे डॉक्टर को प्रभार देते है जो प्रभारी बनने के योग्य है ही नहीं।
जब इस बात की जानकारी मिली तो देशज टीम ने पड़ताल कर मामले की सच्चाई जानने की कोशिश की इस दौरान जो बाते सामने आई उससे स्पष्ट होता है कि कहीं ना कही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बनने के लिए मोटी रकम का खेल चल रहा है।
और, इस पैसे के खेल में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। अब सवाल यह है कि जिले के सीएस के आदेश सर्वोच्च है या उच्च न्यायालय के। आखिर पदाधिकारियों में इतनी हिम्मत आती कहा है जो उच्च न्यायालय के आदेश को भी ताख पर रख अपना नियम चलाये। अगर देखा जाये तो ये सिर्फ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुशेश्वरस्थान पश्चिमी ही नही बल्कि जिले के कई पीएचसी में ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
- Advertisement -

जरूर पढ़ें

स्मृति ईरानी का वैलेंटाइन संदेश: खुद से प्यार करने का दिया खास मंत्र, फैंस हुए कायल

Smriti Irani News: टीवी की दुनिया की मशहूर अदाकारा और राजनेता स्मृति ईरानी ने...

T20 World Cup: दक्षिण अफ्रीका ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से धो डाला, मार्कराम का तूफान!

T20 World Cup: क्रिकेट प्रेमियों! जिस पल का इंतजार था, वो आ गया है!...

Weekly Horoscope: 15 से 21 फरवरी 2026 का साप्ताहिक राशिफल: महाशिवरात्रि का दिव्य प्रभाव

Weekly Horoscope: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 15 से 21 फरवरी 2026 का यह सप्ताह...

Fake Currency Purnia: पूर्णिया में ATM से जाली नोटों का खेल, बैंकिंग सिस्टम को ऐसे दे रहे थे चकमा

Fake Currency Purnia: बैंकिंग सिस्टम की मजबूत दीवार में सेंध लगाने की कोशिश में...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें