

जाले, देशज टाइम्स। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किए व कराए गए प्राकृतिक खेती का निरक्षण डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञ डॉ. शंकर झा, मृदा विभाग पूसा एवं डॉ. एस एस प्रसाद
मृदा विभाग तिरहुत कृषि महाविद्यालय, ढोली ने कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में भाकृअनु प-अटारी, जोन, पटना
की ओर से संचालित प्राकृतिक खेती के प्रक्षेत्रों का निरीक्षण किया।
केंद्र के अध्यक्ष सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर ने आए हुए विशेषज्ञों को कृषि विज्ञान केंद्र में चल रहे प्राकृतिक खेती परियोजना के सभी पहलुओं के बारे में अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में खरीफ 2022 से प्राकृतिक खेती पर बल दिया जा रहा है।
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सर्वप्रथम धान उसके पश्चात गेहूं की बुवाई प्राकृतिक रूप से की गई है। उन्होंने बताया कि खरीफ में बोई गई राजेंद्र श्वेता धान, 0.59 एकड़ में 19 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ है। जो कि अन्य विधियों से बोइ गई धान के लगभग समानांतर है।
विशेषज्ञों को यह आंकड़ा अत्यंत प्रभावित किया और उन्होंने केंद्र के अन्य विशेषज्ञों का मनोबल बढ़ाते हुए यह कहा कि आप अच्छे तरह से मन लगाकर कार्य करते रहें और प्राकृतिक खेती को अपनाने में कृषकों की अथक मदद करते रहें।
केंद्र के निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों को कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से प्राकृतिक खेती हेतु चयनित ग्राम धनकौल में कृषक क्षेत्रों का परिभ्रमण कराया गया। परिभ्रमण के दौरान फसल उत्पादन वैज्ञानिक डॉ. सिराजुद्दीन एवं गृह वैज्ञानिक पूजा कुमारी ने धनकौल के रामनाथ, राजू यादव एवं मनोज कुमार के खेतों का निरीक्षण करवाया।
इसके उपरांत केंद्र के पौध संरक्षक वैज्ञानिक डॉ. गौतम कुणाल के विशेषज्ञों आग्रह पर, कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से जलवायु अनुकूल कृषि परियोजना अंतर्गत चयनित ग्राम ब्रह्मपुर, रतनपुर एवं सनहपुर का प्रक्षेत्र भ्रमण कराया गया। इस मौके पर केंद्र के विशेषज्ञ कृषि अभियंत्रिकी अंजली सुधाकर मत्स्य विशेषज्ञ डॉ. जगपाल, प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ चंदन कुमार समेत अन्य सहकर्मी उपस्थित रहें।
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