

जाले, देशज टाइम्स। कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में मंगलवार को आंगनबाड़ी सेविकाओं का प्रसार कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुई।
कार्यक्रम के तहत मोटे अनाजों से स्वास्थ्य एवं पोषण लाभ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह वैज्ञानिक पूजा कुमारी ने बताया कि विश्व में वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स इयर के रूप में मनाया जा रहा है।
वैज्ञानिक पूजा कुमारी ने बताया कि मिलेट्स जिन्हें हिंदी में मोटा अनाज कहा जाता है, इसमें ज्वार, बाजरा, रागी, कवनी, सावा इत्यादि अनाज शामिल है। यह पौष्टिक अनाज होते हैं जो फाइबर, खनिज और अन्य पोषक तत्व से भरपूर होते हैं।
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मोटे अनाज विभिन्न बीमारियों जैसे मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्या आदि से लड़ने में भी सहायक होते हैं। मोटे अनाजों में लौह तत्व, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिंस आदि भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।भारत में लगभग 6 से 7 तरीके के मोटे अनाज उगाए जाते हैं। तथा हमारा भारत दुनिया में मोटे अनाज का पांचवा सबसे बड़ा निर्यातक है।
इस कार्यक्रम में जाले प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों के 43 आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षणार्थियों को केंद्र के पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. गौतम कुणाल ने केंद्र के विभिन्न प्रत्यक्षण इकाई जैसे, मशरूम उत्पादन, अजोला, मखाना, केंचुआ खाद, समेकित कृषि प्रणाली एवं जलवायु अनुकूल परियोजना अंतर्गत केंद्र में चल रहे दीर्घकालीन परीक्षण प्रक्षेत्र आदि को दिखाया एवं सभी इकाइयों के बारे में अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जगपाल, प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ चंदन कुमार तथा अन्य कर्मी उपस्थित थे।
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