
नौ विपक्षी पार्टियों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर अपने मन की बात कहीं है। सीबीआई और ईडी के एक्शन पर विपक्ष के नौ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी में मदद की गुहार लगाई है। विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
चिट्ठी में विपक्ष ने सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग करने की बात कहते हुए भाजपा की निंदा की है और इस पर चिंता भी जताई है। हाालंकि इन विपक्षी दलों में कांग्रेस शामिल नहीं है।अभी पीएम मोदी या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया का भी इंतजार है। चिट्ठी ऐसा वक्त लिखी गई है जब आम आदमी पार्टी को दिल्ली की शराब नीति के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चिट्ठी लिखने वालों में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का भी नाम शामिल है। केजरीवाल के अलावा पत्र लिखने वालों में के चंद्रशेखर राव, ममता बनर्जी, भगवंत मान, तेजस्वी यादव, फारुख अबदुल्ला, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव के नाम भी हैं।
चिट्ठी में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा गया है। चिट्ठी में आरोप लगाया गया कि जो नेता भाजपा में शामिल हो जाते हैं, उनके खिलाफ जांच धीमी गति से होती है। विपक्षी नेताओं ने लिखा कि राज्यपाल कार्यालय पर चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों के काम में दखल में भी दखल दिया जाता है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि राज्यपाल केंद्र और राज्यों के बीच बढ़ती दरार का कारण बन रहे हैं।
विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों की छवि खराब हो रही है। चिट्ठी में लिका गया कि 26 फरवरी को पूछताछ के बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया, उन्हें गिरफ्तार करते समय उनके खिलाफ कोई सबूत भी नहीं दिखाए गए। चिट्ठी में लिखा गया कि 2014 के बाद से जिन नेताओं पर भी एक्शन हुआ है, उनमें से ज्यादातर विपक्ष के ही हैं।
पत्र में आगे लिखा गया कि 2014 के बाद से देश में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने जितनी भी कार्रवाई की उनमें अधिकांश विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ ही थीं। जिन नेताओं ने बाद में बीजेपी का दामन था लिया उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
असम के मौजूदा सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का उदाहरण देते हुए पत्र में कहा गया कि हिमंत विस्व सरमा के खिलाफ साल 2014 और 2015 में सारदा चिट फंड घोटाले में जांच की थी। यह जांच सीबीआई ने की थी। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया। इसी तरह टीएमसी से भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय के खिलाफ चल रही नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में जांच भी बंद नहीं कर दी है।






