15 अप्रैल से जनगणना कर्मी आएंगे तो बिहार की अगड़ी जाति में शुमार कायस्थ जाति के लोगों को संभलकर जानकारी देनी होगी। थोड़ी-सी लापरवाही की कि जाति से बाहर हो जाएंगे। क्योंकि उपजाति और टाइटल का फेर फंस गया है।यह संकट जनगणना कर्मियों को जातियों का कोड विवरण देने के बाद सामने आया है।
ऐसे में, 15 अप्रैल से जनगणना कर्मी आएंगे तो बिहार की अगड़ी जाति में शुमार कायस्थ जाति के लोगों को संभलकर जानकारी देनी होगी। थोड़ी-सी लापरवाही की कि जाति से बाहर हो जाएंगे। हुआ यह है कि जारी कोड में एक तो कायस्थ जाति के लिए जारी किया गया है, लेकिन दूसरी जगह एक कोड के तहत हिंदू धर्म के दर्जी के उपनाम के रूप में श्रीवास्तव, लाला, लाल, दर्जी प्रकाशित कर जनगणना कर्मियों को दिया गया है। जनगणना कर्मी भी संशय में हैं कि अगर क्षेत्र में आंकड़ा संग्रह के दौरान लोगों ने आपत्ति की तो क्या होगा?

इधर, 15 अप्रैल से होने वाली जाति जनगणना को लेकर जातियों के कोर्ट की नई सूची जारी कर दी गई है। इसके कारण पहले से जारी कई जातियों के कोड के क्रमांक में बदलाव आ गया है। अब कयास्थ के लिए गणना कोड 21 , कुर्मी 24, कुशवाहा 26, ब्राह्मण 126, भूमिहार 142, यादव 165 हो गया है। अधिकारियों की मानें तो 15 अप्रैल को घटना शुरू होने से पहले सूची एक बार फिर से अपडेट की जा सकती है।
वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग ने जाति की सूची से अगरिया, खड़िया और मारवाड़ी को बाहर कर दिया है। वहीं, विरजिया और सेखड़ा को जोड़ दिया है। इसके साथ ही जाति आधारित गणना के लिए ऑनलाइन एप में जातियों का कोड बदल गया। अब कायस्थ का नया कोड 21 तो कुर्मी-24, कोईरी-26, रविदास-60, ब्राह्मण-126, भूमिहार-142, यादव-165, राजपूत-169, शेख-181 नंबर से जाने जाएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने ऑनलाइन मोबाइल एप में 214 जातियों के लिए कोड जारी किया है। इस सूची में शामिल नहीं होने वाली जाति का अन्य कोड-215 होगा। इस कोड को लिखने से पहले अंचलाधिकारी से लिखित पूर्वानुमति लेनी होगी और उनकी लिखित पूर्वानुमति की प्रति संलग्न कर प्रपत्र समर्पित करना होगा। जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक 15 अप्रैल से जाति आधारित गणना का दूसरा फेज शुरू होगा।
जानकारी के अनुसार,जातीय जनगणना को लेकर जारी कोड 206 कोड में भी सुधार किया गया। इसमें दर्जी (हिंदू) उपनाम श्रीवास्तव, लाला, लाल, दर्जी दर्ज था, जिसे हटाकर सिर्फ दर्जी (हिंदू) कर दिया गया है। जाति आधारित गणना के ऑनलाइन एप में कायस्थ को 21, कुर्मी-24, कोईरी-26, रविदास-60, ब्राह्मण-126, भूमिहार-142, यादव-165, राजपूत-169, शेख-181 कोड मिला है। अब पढ़िए कहां फंसा है कायस्थ
कायस्थों में 12 उप-जातियां हैं। ‘श्रीवास्तव’ कायस्थों की एक उप-जाति है। उत्तर प्रदेश और इससे सटे बिहार में इस उप-जाति के कायस्थ सबसे ज्यादा संख्या में हैं। इसके अलावा कायस्थों को ‘लाला’ भी कहा जाता है। लाला का अर्थ हिसाब-किताब संभालने वाले के रूप में लगाया जाता है। कहीं-कहीं कायस्थों के लिए यह प्रमुख टाइटल भी है। इसी तरह ‘लाल’ भी टाइटल है।”
जातिगत जनगणना के लिए 214 जातियों का कोड जारी किया गया है। इन जातियों का कोड जारी किए जाने के बाद से सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय है। जातियों के लिए कोड निर्धारित किए जाने में ऐसी ही गड़बड़ी को लेकर लोग सरकार को ट्रोल भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि सरकार हिंदू रीत-रिवाज और परंपरा से उलट नई-नई भ्रांतियां फैला रही है। लोग इसे साजिश बताकर पोस्ट भी शेयर कर रहे हैं।
बिहार में जातिगत जनगणना की बात जब से उठी, तभी से इस जाति के लोग विराेध कर रहे हैं। पढ़ने-लिखने की उम्र में इसे जातिगत दलदल में धकेलने की बात कहकर विरोध जताया जाता रहा। अब सरकार की ओर विकल्पहीन होने के बाद जब जाति जनगणना शुरू हो रही है।

