
जाति जनगणना में कर्मियों को जातियों के कोड वितरण के बाद श्रीवास्तव, लाला और लाल दर्जी के उपनाम के रूप में दर्ज कर दिया गया था। इसके बाद बिहार सरकार ने कायस्थ समाज के कड़ा विरोध के बाद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और फौरन संशोधन करवाया। अब श्रीवास्तव, लाला और लाल कायस्थ जाति में रहेंगे। उनका कोड 21 नंबर होगा।
देशज टाइम्स ने भी खबर प्रकाशित किया था…बताइएगा संभलकर…कायस्थों के साथ जातिगत जनगणना में ये क्या हो गया… श्रीवास्तव-लाला- लाल को दर्जी उपनाम… लिस्ट से 3 जातियां हटीं, इनका बदला नंबर इसे सरकार ने गंभीरता से लिया और अब बड़ी खुशखबरी सामने आई। पढ़िए पूरी खबर
दरअसल, कलम-दावात की पूजा करने वाले कायस्थ जाति का बिहार के निर्माण में बड़ा योगदान रहा है। कायस्थों में 12 उप-जातियां हैं। ‘श्रीवास्तव’ कायस्थों की एक उप-जाति है। उत्तर प्रदेश और इससे सटे बिहार में इस उप-जाति के कायस्थ सबसे ज्यादा संख्या में हैं। इसके अलावा कायस्थों को ‘लाला’ भी कहा जाता है। लाला का अर्थ हिसाब-किताब संभालने वाले के रूप में लगाया जाता है। कहीं-कहीं कायस्थों के लिए यह प्रमुख टाइटल भी है। इसी तरह ‘लाल’ भी टाइटल है।
जानकारी के अनुसार, जनगणना कर्मियों को जातियों का कोड विवरण जारी किए जाने के बाद सामने आया था। जारी कोड में एक तो कायस्थ जाति के लिए जारी किया गया था, लेकिन दूसरी जगह एक कोड के तहत हिंदू धर्म के दर्जी के उपनाम के रूप में श्रीवास्तव, लाला, लाल, दर्जी प्रकाशित कर जनगणना कर्मियों को दिया गया था। इसके बाद कायस्थ समाज के लोग सवाल उठाने लगे। वह सरकार से इसमें सुधार की मांग करने लगे।


