back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 12, 2026
spot_img

गरीब को मरने की इसलिए जल्दी है साहब, कहीं जिंदगी की कशमकश में कफ़न महंगा ना हो जाए

spot_img
- Advertisement - Advertisement

लाठियां वहीं चटकती है जहां गरीबों का बसेरा होता है। वो एक दौर था जब गरीबी पर तरस खाते थे लोग दौर अब यह आ गया गरीबी के नाम पर कफन बेचते हैं लोग। उम्मीद जिससे थी वो तो कब का गांधी टोपी पहने निकल लिए जो बचे लाल टोपी में गरीबों पर लाठियां सेंकने लगे। अरे देश को जानने वालों, हकीकत यही है, वो ग़रीबी से हर रोज़ मरता रहा, सर नगीने जड़ा ताज सजता रहा, राजनीति का स्तर है ऐसा गिरा आम इंसान इसमें उलझता रहा। रोटियों के लिए हम तरसते रहे, और गोदाम में धान सड़ता रहा।

- Advertisement -

बेटियां ब्याह की चाह में ही रहीं, बाप बूढ़ा रक़म को भटकता रहा। राह दुशवार भी हर क़दम पर मिली, गरीब बार-बार गिरता रहा फिर संभलता रहा। मगर यकीन मानिए ऐ मेरे दोस्त आज भी, तहजीब की मिसाल गरीबों के घर पे है, दुपट्टा फटा हुआ है मगर उनके सर पे है। ऐ सियासत… तूने भी इस दौर में कमाल कर दिया, गरीबों को गरीब अमीरों को माला-माल कर दिया। जनाजा बहुत भारी था उस गरीब का, शायद सारे अरमान साथ लिए जा रहा था। मगर यकीन मानिए, हमारे देश की मौजूदा हालात यही है, यहां गरीब को मरने की इसलिए भी जल्दी है साहब, कहीं जिंदगी की कशमकश में कफ़न महंगा ना हो जाए।गरीब को मरने की इसलिए जल्दी है साहब, कहीं जिंदगी की कशमकश में कफ़न महंगा ना हो जाए

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

हरियाणा में बंपर Sarkari Naukri: 4227 पदों पर आवेदन शुरू

Sarkari Naukri: हरियाणा में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक...

विजया एकादशी व्रत के नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं, जानें संपूर्ण विधि

Vijaya Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है...

एलन मस्क: फोर्ब्स की सूची में शीर्ष पर, अमेरिका के ‘Innovation’ सम्राट

Innovation: जब बात दुनिया को बदलने वाले विचारों और असाधारण साहस की आती है,...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें