



हर खास और आम को सूचित किया जाता है कि इन दिनों शहर में अतिक्रमण की छूट है। जिस किसी को भी कहीं खाली जगह मिले सड़क किनारे, स्टेशन के बाहर, बीच बाजार अपना पांव पसार सकता है इसके लिए जिला प्रशासन से उसे कोई स्वीकृति की जरूरत नहीं है हां बस यह ध्यान रखें कि वह जगह पूरी तरह खाली हो और अतिक्रमण के लायक हो। आप शौक से वहां अतिक्रमण कर सकते हैं हां बस एक बात का ध्यान रखेंगे अगर कोई थाना प्रभारी कोई उनका कर्मचारी आपके पास आता है चाय-नाश्ता के बास्ते कुछ मांगता है तो इतना बस करेंगे उन्हें भरपूर नाश्ता कराएंगें हो सके तो कुछ दक्षिणा भी देकर सकुशल विदा करेंगे इसके लिए जिला प्रशासन आपका आभारी रहेगा।
हां साहेब, यह बात आपको हजम नहीं हो रही होगी लेकिन यही शहर के मिजाज की सत्यता है। यहां हर कोई अतिक्रमण में व्यस्त है। प्रशासन की कहीं कोई दबाव नहीं है तो फिर आप जब सब कर रहें हैं तो क्यों पीछे रहें. जो होगा सो देखा जाएगा। वैसे भी सरकार को दरभंगा के प्रशासन को कुछ दिखता नहीं है ,सब आंखों पर पट्टी बांध कर बैठे हैं ,फिर भी यदि किसी को कुछ दिख जाएगा तो बगल के थाने में आपका चांदी का जूता काम करेगा। इस जूते में हैं बड़े बड़े गुण .हर शहर ,गांव ,सड़क, वन सब में अतिक्रमण की छाई बहार है, जिसमें जितनी हिम्मत हो उतना अतिक्रमण कर ले. दूसरे ने अतिक्रमण कर लिया यह रोना रोने के बजाए खुद भी कहीं अतिक्रमण कर लो दादा की सुनिए जब वो अतिक्रमण की शिकायत करने पहुंचे एक थाने में वहां, उन्हें एक पुलिस के कारिंदे ने समझाया था, जब दादा शिकायत लेकर गए थे , उसने कहा, अतिक्रमण के लिए शेर सा दिल और जेब भरी होनी चाहिए. चिड़िया के दिल वाले क्या खाकर अतिक्रमण करेंगे। ऐसे में, आप सबतो बब्बर शेर हैं किसी से डरते नहीं, कानून ताक पर, पुलिस जेब में, प्रशासन तक पहुंच, नेताओं की पैरवी साथ फिर डर क्या क्योंकि शहर के हालात यहीं हैं, तुम भी इस शहर में बन जाओगे पत्थर जैसे, हंसने वाला यहां कोई है न रोने वाला।




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