



दरभंगा, देशज टाइम्स। दरभंगा का दो चेहरा। एक नगर निगम की बदसूरत, धिनौना चेहरा, गलियों में कूड़ा, लचर प्रशासनिक व्यवस्था, वहीं सरकारी कार्यालयों के बदतर होते हालात। जहां, बिना घूस दिए सरकारी योजनाओं की खनक ही नहीं सुनाई पड़ती है। गरीबों के घर में दीये बिना घूस का चढ़ावा चढ़ाए जलते ही नहीं। हालात इतने बदतर, एक जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए प्रखंडों के लगाने पड़ते चक्कर। वहीं, नगर निगम का दावा, हमारे जैसा कोई नहीं।
खेड़िया सरकार की पस्त होती हालत के बीच नगरवासी हलकान, परेशान। हालात यही, अपने मन में अक्सर सोचा करता हूं कई बार अपने देश में ही क्यों फैला है इतना भ्रष्टाचार। नेता व अधिकारी सारे क्यों हैं मालामाल। मेहनतकश व मज़दूर देश का हो गया कंगाल। मैंने देखा अधिकारियों के घर एक भी मच्छर नहीं देखा। क्या खरीदकर लाते होंगे अधिकारी इस बिकते बीच बाज़ार से, अगर वही पाउडर छिड़क देते फिर क्यों दिखते शाम होते ये मच्छर हर गली, हर नुक्कड़, ग्राउंड फ्लोर, टॉप फ्लोर हर जगह लगातार।
ऐसे में, भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है नौकरशाही सब पे भारी है हर एक को रिश्वतखोरी की बीमारी है भ्रष्ट लोगों के खिलाफ जो आवाज़ उठाता है बहुत जल्दी ही आवाज़ दबा दिया जाता है व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है।







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