



आजकल चमचों का बहुत बोलबाला चल रहा है बाज़ार में, सामान्यतः हर तरफ चमचे ही चमचे दिख रहें हैं| वैसे एक बात कहूँ तो आम जीवन में चमचे रखना केवल विलासिता का ही प्रतिक माना जाएगा क्योंकि हम जब चूरमा खाते है तो चम्मच का उपयोग करते है पर वो हम बिना चम्मच भी खा सकते है, खीर पीते है तब भी हम उसे बिना चम्मच के पी सकते है पर हम वहां चम्मच का उपयोग करने लगे है और धीरे-धीरे आनंद लेकर खीर का मजा लूटने लगे हैं। चमचागिरी का हर तरफ बोलबाला है, पोलिटिक्स हो या हो ऑफिस का कोई काम, चमचे मिल जाएंगे हर जगह मांगने के लिए इनाम, हर जगह चमचों ने अपना शासन जमाया है, आम आदमी समाज के ये हालत देख कर घबराया है, हर जगह चमचों ने अपना अधिकार जमाया है, कहीं नहीं होता चमचों के बिना काम है।
ऑफिस में होता चमचों का भी बड़ा नाम है। ऐसे में चमचे हमें विलासी स्वभाव का बना रही हैं। कभी खुद चमचे बनते हैं,या किसी को बनाते हैं, येन-केन-प्रकारेण अपना नाम कमाते हैं। अगर कोई मुसीबत आ भी जाए तो, चमचों पर ड़ाल खुद बरी हो जाते हैं।आजकल चमचों का धंधा बड़े जोरों पर चल रहा है, जहां देखो, जिसे देखो वही चमचा बन रहा है। यहां छोटे-बड़े,फोर्क,मस्का लगाने वाले चमचे बिकते हैं, आपको क्या चाहिए,यह आप सोच सकते हैं? आजकल हर जगह चमचे आ गए हैं,प्रशंसा पाने के सस्ते ढंग लोगों को भा गये हैं। इसलिए आज से चमचे खरीदने का काम करो, फिर चाहे जो कहो,वाहवाही पाने का नाम करो।




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