



इन दिनों नगर में यातायात व्यवस्था नाममात्र की रह गई है। ट्रैक्टर, ऑटो, छोटे वाहन यहां तक कि रिक्शा व बाइक चालक अपने मन के मालिक हैं। नगर में जहां मन हुआ वाहन खड़े कर देते हैं। इससे अक्सर मार्गों पर जाम लग जाता है। बाजारों में दोपहिया वाहन अव्यवस्थित खड़े मिलते हैं। सब्जी व अन्य ठेलों को कोई छेड़ने वाला नहीं है। दुकानें जहां-तहां लगी मिलेंगी। व्यवसायी अपनी दुकानें बाजारों के बाहर सड़कों पर सजा रखे हैं। इससे हमेशा यातायात बाधित होता है।
दिन में किसी भी समय बाजार की गलियों से नए मकानों के लिए ईंट भरे ट्रैक्टरों का निकलना व खाली होना आम है। इसका कोई समय निर्धारित नहीं है। इससे मार्गों पर जाम लगता रहता है। वहीं, सड़कों पर ट्रिपल लोडिंग आम बात हो गई है। वाहन चलाने वालों की स्पीड निर्धारित नहीं है। कोई भी बगल से सट से निकल जाए ऐसे मानों सड़क उनके बाप की हो।
हालात बेकाबू हैं। इन दिनों नए कप्तान बाबू राम ने शहर की यातायात को व्यवस्थित करने का संकल्प दोहराया। वो अगर चाहेंगे शहरवासी सुधर जाएंगें यह हमारा विश्वास है। ऐसे में जब दादा से सवाल किया तो दादा कहिन, न किसी के दांत तोड़ें, न अपने तुड़वाएं, कृपया गाड़ी धीरे-धीरे चलाएं




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