



सरकारी दफ्तरों में बिजली का बिल, टेलीफोन का बिल, निगम का बिल सब ठंडे बस्ते में है। लाखों लाख के बकाए इन सरकारी दफ्तरों पर रहने के बाद भी हर्जाना या उसका खामियाजा इन अधिकारियों व उनसे जुड़े कर्मियों को कतई भुगतना नहीं पड़ता है हां यही बकाया आम लोगों के सिर हो तो फिर शामत आ जाती है। बिजली कट जाती है। फोन की घंटी बंद हो जाती है। पानी रूक जाता है। एफआईआर तक हो जाती है। साहेब ऐसा जुलम ना करो। देखो हम भी संभ्रात नागरिक हैं मेरी भी सुनो। जो बुढ्ढे खूसट नेता हैं, उनको खड्डे में जाने दो। बस एक बार, बस एक बार मुझको सरकार बनाने दो। मेरे भाषण के डंडे से, भागेगा भूत गरीबी का। मेरे वक्तव्य सुनें तो झगड़ा मिटे मियां और बीवी का।
मेरे आश्वासन के टानिक का एक डोज़ मिल जाए अगर, चंदगी राम को करे चित्त, पेशेंट पुरानी टीबी का। मरियल सी जनता को मीठे, वादों का जूस पिलाने दो, बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो। जो कत्ल किसी का कर देगा मैं उसको बरी करा दूंगा, हर घिसी पिटी हीरोइन कि प्लास्टिक सर्जरी करा दूंगा; लड़के-लड़की और लैक्चरार सब फिल्मी गाने गाएंगे, हर कॉलेज में सब्जैक्ट फिल्म का कंपल्सरी करा दूंगा। हिस्ट्री और बीज गणित जैसे विषयों पर बैन लगाने दो बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो। जो बिल्कुल फक्कड हैं, उनको राशन उधार तुलवा दूंगा, सरकारी अस्पताल में जिस रोगी को मिल न सका बिस्तर, घर उसकी नब्ज़ छूटते ही मैं एंबुलैंस भिजवा दूंगा। मैं जन–सेवक हूं, मुझको भी, थोड़ा सा पुण्य कमाने दो, बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो।




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