



प्रेम की अभिव्यक्ति श्रेष्ठ है और किस विधा में वह की गई है इससे प्रेम के एहसास कभी कम नहीं होते। मगर, आधुनिकता की होड़ में प्रेम का मतलब ही अब उल्टा हो गया है। यहां, पहले वाली नौजवानों की हालत नहीं रही जहां नायक व नायिका के मधुर संबंध एक दहलीज के अंदर मर्यादित होते थे आज उसमें फूहड़ता ने ऐसा रंग घोल दिया है जिससे प्रेम के मायने ही बदल दिए हैं। कभी रोज दिवस के नाम पर कहीं चौदह फरवरी को वैलेंटाइन दिवस के नाम पर।
मगर, प्यार बेहद खूबसूरत शब्द है। इसमें मर्यादा है तो प्रेमी के प्रति समर्पण भी लेकिन हाल के कुछ दिनों में वैलेंटाइन के नाम पर फूहड़ता ने हर घर को शर्मसार कर दिया है जिस वजह से पुलिस को इस खास दिवस पर डंडे लेकर निकलना पड़ता है तो कुछ सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को मारपीट पर भी उतारू होता देखना आम है कारण भी साफ है, उन्मुत्त जोड़े खुलेआम इसका इजहार करने से आज नहीं चूक रहे लिहाजा कड़ुआहट प्यार पर हावी होता साफ दिख रहा है।
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है,कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है, यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आंसू हैं, जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है…। वहीं, रहीम के वचन आज भी हमें सुसंस्कृत करते काफी है, जे सुलगे ते बुझि गए बुझे तो सुलगे नाहि, रहिमन दाहे प्रेम के बुझि बुझि के सुलगाहि।




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