
सरकारी योजनाओं में लूट-खसोट में अधिकारी जुटे हैं। मगर जानते नहीं, हिंदुस्तान की संपत्ति सरकार की संपत्ति है, इसे जो खाएगा ज्यादा जिंदा रहेगा ऐसा नहीं है। देश से भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता जल्दी इसलिए चले गए, क्योंकि इन्होंने देश की जनता का कुछ खाया नहीं, जिन्होंने खाया, वे अभी भी नेता हैं। हालात हर सरकारी योजनाओं में यही है। बिना रिश्वत के कहीं भी लाभुक को कुछ नहीं मिलता। ऐसे में, ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं, मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बेख़बर नहीं।
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