



दरभंगा, देशज टाइम्स। पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहा जाता है। देश को चलाने में पत्रकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार बनाने बिगाड़ने की बात है करता, सिस्टम सुधारने की दम है रखता मगर आज हालात बदल गए हैं। फर्जी पत्रकारों की बाढ़ है जिन्हें कलम चलाने का हुनर नहीं वो पत्रकार बने हैं। दीवानगी की हदों को पार है करता, कलम कैमरे से प्रहार है करता, कभी दंगो में कभी बलवो में खबर पाने की फ़िक्र में, जनता को सच दिखलाने की जिद में खूब पैसे ऐंठता,अपनी फ़िक्र जो नहीं है करता, धन से वंचित वह है रहता मगर कौन ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार जिसका मिशन ही पत्रकारिता है।
मगर, अफसाने यहीं हैं, सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं, ना समझ था पहले अब समझदार हो गया हूं। बहुत गुस्सा था इस व्यवस्था के खिलाफ अब उसी का भागीदार हो गया हूं। कभी नफरत थी कुछ छपी हुई खबरों से मुझे आज उन्हीं खबरों का तलबगार हो गया हूं। सोचा था अलग राह पकडूंगा पत्रकार बनकर अब मैं भी भेड़ चाल में शुमार हो गया हूं। लिखकर बदलने चला था दुनिया को मैं नौकरी की वफादारी में खुद बदल गया हूं। मुझे दिख रही है देश की तरक्की सारी क्योंकि अब मैं नेताओं का यार हो गया हूं। इंकबाल वंदे मातरम कई नारे आते हैं मुझे पर क्या करूं विज्ञापनों के कारण लाचार हो गया हूं। सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं।



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