



दरभंगा, देशज टाइम्स। दरभंगा टावर का नजारा बदलता कम बदहाल ज्यादा दिख रहा है। नए एसएसपी आते हैं तो कुछ हिपडॉप दिखता है। फिर जहां-तहां पुलिस को नजराना पेश कर अवैध तरीके से दुकान सज जाती है। अधिकांश जगहों पर फुटपाथी दुकानदार नजर आने लग रहे हैं। बुधवार का दिन टावर के चारों तरफ फुटपाथी दुकानदारों के ठेलों के कई चक्र से पूरी तरह ढ़के मिले। कहीं खाली-खाली जगहें दिखी ही नहीं हर तरफ अतिक्रणकारी।
इन अवैध दुकानदारों की वजह से बाइक तक को गुजरने में परेशानी होती है।दरभंगा टावर पर आमतौर पर चार दर्जन से अधिक फुटपाथी दुकानदारों का कब्जा है। सड़क के बीचों-बीच वाहन भी बेतरतीब लगे मिले। एसएसपी साहेब को अब टावर की याद नहीं आती। पुलिस तो पहले तैनात रहती थी लेकिन इनका काम सिर्फ अब अवैध वसूली ही रह गया है। दुकान की हैसियत के आधार पर वसूली हो रही है।
दरभंगा टावर चौक पर सजने वाली फुटपाथी दुकानों के कारोबार की क्षमता के आधार पर उनसे वसूली की जाती है। ठेला वाला, रिक्शा वाला, चप्पल सिलने वाला, फल वाला, जूता वाला हर किसी का रेट अलग-अलग।
सड़क पर बैठकर सामान बेचने वालों से दस रुपए, छोटे ठेला दुकानदारों से बीस से पचास रुपए रोजाना व कुछ बड़े ठेला व्यवसायियों से प्रत्येक माह 3500 रुपए तक पुलिस वसूल करती है। ऐसे में, उस शख़्स की तलाश मुझे आज तलक है, जो दरभंगा टावर के दरबार में, जाकर नहीं बदले। कहते हैं लोग हमसे बदल जाओ ऐ टावर पर हमने टावर के, ये तेवर नहीं बदले।






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