



दरभंगा देशज टाइम्स। जल ही जीवन जल सा जीवन, जल्दी ही जल जाओगे, अगर न बची जल की बूंदें, कैसे प्यास बुझाओगे। नाती-पोते खड़े रहेंगे जल, राशन की कतारों में, पानी पर से बिछेंगी लाशें, लाखों और हजारों में। रिश्ते-नाते पीछे होंगे, जल की होगी मारामारी, रुपयों में भी जल न मिलेगा, जल की होगी पहरेदारी। हनन करेंगे शक्तिशाली, नदियों के अधिकारों का, सारे जल पर कब्जा होगा, बाहुबली मक्कारों का।मत करो मुझको बर्बाद, इतना तो तुम रखो याद,प्यासे ही तुम रह जाओगे, मेरे बिना न जी पाओगे।कब तक बर्बादी का मेरे, तुम तमाशा देखोगे,संकट आएगा जब तुम पर, तब मेरे बारे में सोचोगे।संसार में रहने वालों को, मेरी जरूरत पड़ती है,मेरी बर्बादी के कारण, मेरी उम्र भी घटती है।
ऐसा न हो इक दिन मैं, इस दुनिया से चला जाऊं, खत्म हो जाए खेल मेरा, लौट के फिर न वापस आऊं। पछताओगे-रोओगे तुम, नहीं बनेगी कोई बात,सोचो-समझो करो फैसला, अब तो ये है तुम्हारे हाथ। इधर हालात यही, मत करो मुझको बर्बाद, इतना तो तुम रखो याद, प्यासे ही तुम रह जाओगे, मेरे बिना न जी पाओगे। कब तक बर्बादी का मेरे, तुम तमाशा देखोगे,संकट आएगा जब तुम पर, तब मेरे बारे में सोचोगे।संसार में रहने वालों को, मेरी जरूरत पड़ती है,मेरी बर्बादी के कारण, मेरी उम्र भी घटती है। ऐसा न हो इक दिन मैं, इस दुनिया से चला जाऊं,खत्म हो जाए खेल मेरा, लौट के फिर न वापस आऊं।पछताओगे-रोओगे तुम, नहीं बनेगी कोई बात, सोचो-समझो करो फैसला, अब तो ये है तुम्हारे हाथ।

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